कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में कोई जानता नहीं, लेकिन टिकट ही चाहिए-मुलायम

लखनऊ.राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर बुधवार को लोहिया पार्क में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां मुलायम सिंह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यकर्ता केवल नारेबाजी करते हैं। उन्‍हें क्षेत्र में कोई नहीं जानता, लेकिन टिकट ही चाहिए। वहीं, कार्यक्रम से पहले अखिलेश यादव और शिवपाल यादव ने लोहिया ट्रस्ट और लाहिया पार्क पहुंचकर प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।

 नारेबाजी के शिवा कुछ नहीं जानते कार्यकर्त्ता – मुलायम

 लोहिया जी को पूरा देश याद कर रहा है।

– लोहिया जी बहुत बड़े विचारक थे।
– 23 अगस्‍त 1967 को लाहिया जी से आखिरी मुलाकात हुई थी।
– आज कल कार्यकर्ता मेहनत तो करते हैं, लेकिन सिद्धांतों पर नहीं चलते।
– केवल नारेबाजी करते हैं कार्यकर्ता, और मेहनत की जरूरत है।
– कार्यकर्ता भाषण नहीं सुनते। हमने कितने भाषण सुने थे।
– महापुरुषों के बारे में कार्यकर्ता नहीं पढ़ते।
– इतना अच्‍छा ट्रस्‍ट बनाया गया, लेकिन कोई कार्यकर्ता उनको पढ़ने वहां नहीं जाता।
– किसी को याद ही नहीं लोहिया जी का भाषण।
– मुझे उनका हर भाषण याद है।
– आजकल सिर्फ टिकट की जल्‍दी है, काम करने की नहीं।
– कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में कोई जानता ही नहीं, लेकिन टिकट चाहिए।
लोहिया के 50 फेमस भाषणों की बनी एक सीडी
– लोहिया की 50वीं पुण्‍यतिथि पर समाजवादी पार्टी लोहिया के 50 फेमस भाषणों की एक सीडी कार्यकर्ताओं में बांटेगी।
– इसके साथ ही आज अस्‍पतालों में कार्यकर्ता फल भी वितरित करेंगे।
 फैजाबाद में जन्म हुआ था लाहिया का
– लोहिया का जन्म फैजाबाद में 23 मार्च 1910 को हुआ था।
– उनके पिता हीरालाल टीचर थे और गांधीजी के अनुयायी थे।
– उनकी मां का नाम चंदा देवी था।
– लोहिया जब ढाई साल के थे, तो उनकी माता का देहांत हो गया था।
– गांधीजी के अनुयायी होने के कारण लोहिया के पिता अक्सर उनसे मिलने जाया करते थे।
– इस दौरान वे अपने साथ लोहिया को भी ले जाते थे। इस वजह से लोहिया पर महात्मा गांधी का काफी असर था।
– 9 अगस्त, 1942 को महात्मा गांधी ने देश में भारत छोड़ो आंदोलन छेड़ दिया था।
– बड़े पैमाने पर ब्रिटिश सरकार नेताओं की गिरफ्तारी कर रही थी।
– गांधीजी सहित कई बड़े कांग्रेस नेता को गिरफ्तार कर लिया गया था।
– ऐसे में लोहिया भूमिगत होकर आंदोलन की अगुआई कर रहे थे।

मुंबई से हुए थे गिरफ्तार

– 20 मई 1944 को उन्हें मुंबई (तब बम्बई) से गिरफ्तार कर लिया गया और लाहौर जेल में बंद कर दिया गया।
– इसके बाद 1945 में उन्हें आगरा जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
– 11 अप्रैल 1946 को अंग्रेजों ने उनको रिहा किया। इसके बाद उन्होंने समाजवाद का रास्ता चुना और देश के प्रख्यात समाजवादी नेता के रूप में मशहूर हुए।
– 30 सितंबर, 1967 में उन्हें इलाज के लिए नई दिल्ली स्थित वेलिंगटन अस्पताल (अब लोहिया अस्पताल) में भर्ती कराया गया था।
– वहां 12 अक्टूबर को 57 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई।

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