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खजुराहो के इस मंदिर में नहीं हैं कोई कामुक मूर्तियां!

जब भी खजुराहो मंदिर का जिक्र होता है, तब बात काम कलाकृतियों की जरूर बात होती है। ये कलाकृतियों स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण पेश करती हैं। सदियों पुरानी कलाकृतियों में उस समय के कामशास्त्र का सजीव चित्रण मौजूद है।

लेकिन इन मंदिरों के अंदर भी बहुत कुछ है। वह है आध्यात्मिक शांति। यह शांति तभी मिल सकती है, जब कोई व्यक्ति पूर्ण रूप से अपनी वासनाओं का तर्पण कर मंदिर में प्रवेश करे।

कहां हैं मंदिर

चंदेल वंश के राजाओं ने 85 मंदिरों का निर्णाण करवाया था, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 25 मंदिर ही मौजूद हैं। मंदिर मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो में हैं।

मतंगेश्वर मंदिर में नहीं है कामुक मूर्तियां

– यहां स्थित मतंगेश्वर मंदिर आध्यात्मिक आराधना का केंद्र है। मतंगेश्वर का एक अर्थ प्रेम का देवता भी होता है।

-कहते हैं यहां शिव-पार्वती विवाह हुआ था। मतंगेश्वर मंदिर में ढाई मीटर ऊंचा शिवलिंग है, जिसका व्यास एक मीटर से भी ज्यादा है।

– मतंगेश्वर मंदिर के स्तंभ और दीवारों पर यहां के बाकी मंदिरों की तरह कामुक मूर्तियां आदि नहीं उकेरी गई हैं।

– शिवलिंग के बारे में मान्‍यता है कि यह शिवलिंग जितना जमीन से ऊपर दिखाई देता है, उतना ही धरती के भीतर है।

– मान्यता है कि राजा चंद्रदेव को एक मरकत यानि पन्‍ना मणि मिली थी, जिससे वह राज्य की सुरक्षा करते थे। यह मणि ही इस शिवलिंग के नीचे है।

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