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गांव में पानी और शौचालय की व्यवस्था नहीं, अफसर आये तो बैंड बाजा से किया स्वागत..

रायपुर/धमतरी/राजनांदगांव।  राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन ने छत्तीसगढ़ के सामुदायिक स्वच्छता मॉडल को बेहतर मानते हुए दूसरे राज्यों को भी इसका अध्ययन करने कहा है। सोमवार को 5 राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश व तेलंगाना के कलेक्टर, जिला पंचायत अध्यक्ष, सीईओ व स्वच्छता मिशन के अफसर राज्य के दौरे पर पहुंचे। मंगलवार को मंत्रालय में पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने इस 20 सदस्यीय दल को अभियान को सफल बताया। उपलब्धियों के सरकारी आंकड़े सुना दिए कि अब तक 4 जिले, 59 ब्लॉक, 6 हजार पंचायत ओडीएफ हो चुके हैं।

जबकि हकीकत में जिन गांवों में अफसर भेजे गए हैं वहां प्रशासन ने आनन-फानन में दिखावे का काम करवाया है। इस खुलासे के अलावा ग्रामीणों ने बड़ा सवाल ‘गर्मियों में पीने को पानी नहीं मिलता, शौचालयों का क्या होगा” उठाया। अफसर दोपहर में राजनांदगांव व धमतरी जिले के संबंधित गांव देखने गए। वे रात वहीं रुकेंगे व बुधवार सुबह स्वच्छता दूतों से रूबरू होंगे, काम देखेंगे। लौटकर फीडबैक भी देंगे। दोनों जिले के गांव जहां अफसरों को ले जाया गया है।

देखिए वहां क्या कुछ हुआ-

जिस गांव में गए अफसर वहीं अधूरे हैं शौचालय

राजनांदगांव में खैरागढ़ के सहसपुर और देवरीभाठ गांव हाल में ओडीएफ घोषित हुए हैं। वहां इसका उत्सव मनाया जा रहा है। इसी बीच अफसर पहुंचे तो बैंड-बाजे से स्वागत हुआ। टीम में तेलंगाना के वारंगल और महबूब नगर के कलेक्टरों के साथ ही कुछ जिलों के जिला पंचायत सीईओ शामिल थे। अफसरों ने ग्रामीणों से घुलनेमि लने की कोशिश की और अपने काम की बात जानी। पूछा कि शौचालय बनाने से उनकी जिंदगी कैसे बदली है। बाद में ग्रामीणों ने कहा-अफसरों के आने की सूचना पर आनन-फानन में शौचालय बनाए। कुछ तो अब भी अधूरे हैं।

बस्ती में एक हैंडपंप, गर्मी में शौचालय क्या काम आएंगे

धमतरी के नगरी ब्लॉक की बांधा पंचायत के मोहलमल्ला गांव में महाराष्ट्र के वासिम व अमरावती जिले के जिपं सीईओ सहित आंधार व कर्नाटक के दूसरे वरिष्ठ अफसरों का स्वागत स्कूली बच्चों ने बैंड बाजे से किया। 6 घंटे देर से पहुंचे अफसरों का इंतजार ग्रामीण सुबह 11 बजे से कर रहे थे। एक ग्रामीण ने कहा -हमारे गांव में कोई कलेक्टर कभी नहीं आया। अब कलेक्टर आ रहे हैं तो शायद गांव की किस्मत चमके। महिलाओं ने बताया -एक हैंडपंप के भरोसे पूरी बस्ती है। अभी तो शौचालय का उपयोग कर रहे हैं, गर्मी में बिना पानी कैसे उपयोग कर पाएंगे?

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