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जानिए कैसे बाघिन बन गई आदमखोर

tiger_1476079869आखिर कम उम्र में ही बाघिन आदमखोर कैसे बन गई। इस सवाल का जवाब देना भी वन विभाग के अफसरों के लिए चुनौतिपूर्ण है। प्रथमदृष्टया दांत टूटने और नाखून उतरने की वजह से इसका आदमखोर होना माना जा रहा है।

अमूमन उम्र की अधिकता, बीमारी और दांत टूटने पर बाघ आदमखोर हो जाता है, लेकिन आतंक का पर्याय बनी इस बाघिन की उम्र महज छह साल आंकी जा रही है। पश्चिमी वृत के सीएफ डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कैमरा ट्रैप में बाघिन का दायीं तरफ का दांत टूटा दिखाई पड़ रहा है और ये किसी बीमारी से ग्रस्त भी दिख रही है।

साथ ही उसके एक नाखून का बक्कल भी निकला हुआ है। वह चार-पांच दिन से भूखी भी है। दांत टूटने और बीमारी की वजह से वह ज्यादा नहीं खा पा रही है। ये इसके आदमखोर होने के लक्षण है। अब इसके खात्मे के बाद ही और अधिक जानकारी मिल सकेगी।

एक सवाल और उठ रहा है कि यह बाघिन दूसरी जगह से आई या यहीं पली-बड़ी। इस पर भी वनाधिकारी गहन चिंतन में जुटे हैं।

combing-for-tiger-tigress_1476118294बाघिन की खोज में लगाए शिकारी कुत्ते

रामनगर क्षेत्र में एक माह से अधिक समय से आतंक का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन अभी विभाग की पकड़ से बाहर है। बृहस्पतिवार को बाघिन को खोजने के लिए शिकारी कुत्ते लगाए गए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। बाघिन फिर तल्ला कानियां पहुंच गई है। कैमरा ट्रैप में कैद होते ही विभाग ने वहां मचान बनाकर घेराबंदी शुरू कर दी है। साथ ही पिंजरा लगाकर भैंसें और बकरे बांध दिए गए हैं।

बृहस्पतिवार को 38वें दिन विभाग ने बाघिन की खोज के लिए चार शिकारी कुत्तों की मदद ली। बाघिन तीसरी बार तल्ला कानियां पहुंच गई है। बाघिन की घेराबंदी के लिए 25 कैमरा ट्रैप, 6 पिंजरे, दो कटरे और दो बकरे बांधने के साथ चार मचान बनाए गए हैं। हर मचान पर दो-दो शिकारी बैठाए गए हैं। सीएफ डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया बाघिन को खोजने के लिए नानकमत्ता और जोलासाल से चार शिकारी कुत्ते मंगाए गए हैं, जो कारगर साबित हो रहे है। उन्हीं की मदद से कांबिंग के दौरान बाघिन की उपस्थिति का अंदाजा लगाया गया। कुत्तों के जरिए शुक्रवार को भी अभियान चलाया जाएगा।

साठ लाख खर्च, फिर भी हाथ खाली
आदमखोर बाघिन को मारने के लिए चलाए गए अभियान में अब तक साठ लाख रुपए से अधिक खर्च हो गए हैं, फिर भी जंगलात के हाथ खाली हैं। दो दिन हैलीकाप्टर से तलाश की गई। एक ड्रोन, तीन हाथी, सौ से अधिक कैमरा ट्रैप, सात पिंजरे, संभावित ठिकानों पर मचान, जाल और हाका लगाने वाले साठ राय सिक्खों के साथ सौ से अधिक विभागीय स्टाफ तैनात किया गया। अब चार शिकारी कुत्तों को बुलाया गया है। ये किसी वन्य जीव को पकड़ने के लिए चलाया गया राज्य का अब तक का सबसे बड़ा अभियान है

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