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दंतेवाड़ा(छत्तीसगढ़ ): अंधविश्वास के चलते ग्रामीणों ने नहीं ली दवा,दैवीय प्रकोप को बताया कारण

कटेकल्याण ब्लॉक के ग्राम मारजूम और बैंगलुरू में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत के बाद भी ग्रामीण सरकारी दवा से परहेज कर रहे हैं। गांव पहुंचे स्वास्थ्य अमले से दवा लेना तो दूर मरीजों के करीब पहुंचने से मना कर दिया है। उन्हें विश्वास है कि ग्राम देवता सब ठीक कर देंगे।

बावजूद टीम ने कुछ लोगों को दवा और समझाइश दी है। गांव में मृत्यु भोज और त्योहार के चलते ग्रामीणों के घर में कच्चा-पका मांस भी उपलब्ध है, जिससे लोगों के बीमार होने और मौत की आशंका बनी है। जिले के कटेकल्याण थाना क्षेत्र के ग्राम मारजूम और बैंगलुरू के ग्रामीण बीमार होने के बावजूद सरकारी दवा खाने से मना कर रहे हैं।

उनका कहना है कि गांव में दैवीय प्रकोप है। इसके चलते लोग मारे गए, देव सब ठीक कर देंगे। गांव में अभी भी छोटे-बड़े दर्जन भर ग्रामीण बीमार हैं। यहां तक की बीमारी और कमजोरी से मृत ग्राम वड्डे (सिरहा) की बुर्जुग पत्नी और मासूम पोता भी बीमार हैं। पोता कुपोषण का शिकार है जिसे क्षेत्रीय कार्यकर्ता ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाने के लिए कहा लेकिन परिजन नहीं मान रहे हैं।

एक पखवाड़े में सात लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य अमला दोनों गांव में कैंप कर रहा है। समझाइश पर कुछ ग्रामीणों ने दवा तो ली लेकिन सेवन नहीं किया। ग्राम मारजूम पहुंची टीम ने जब अपने सामने दवा खाने कहा तो उन्हें बैरंग लौटने के निर्देश मिले। ज्ञात हो कि नक्सल प्रभावित कटेकल्याण के मारजुम में पांच अक्टूबर को 6-7 लोगों की मौत हो गई।

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