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दशहरा के दिन करें नीलकंठ के दर्शन, पूरी होगी हर मनुकामना

आज देशभर में दशहरा और विजयादशमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विजयादशमी के दिन रावण का वध करने से पहले भगवान राम ने नीलकंठ का दर्शन किया था। इसके बाद उन्होंने बलशाली रावण को मारने में सफलता पाई। कहा जाता है कि अगर आपको अपनी कोई विश पूरी करनी हो तो आज नीलकंठ का दर्शन जरूर करें।

इस पक्षी के शरीर का रंग नीला है और इस वजह से इसे नीलकंठ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ भी है। इस पक्षी में भगवान शिव के उस रूप का प्रतीकात्मक दर्शन होते हैं, जिसमें शिव ने समुद्र मंथन से विष का पान किया था। इस कालकूट नामक हलाहल विष को शिव ने अपने कंठ में ही धारण कर लिया। इसी के कारण उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।

दशहरे के दिन कई लोग सुबह ही नीलकंठ के दर्शन करने के लिए घर से निकल पड़ते हैं। हालांकि भारत के 4 राज्यों बिहार, कर्नाटक, आंधप्रदेश और ओडिशा के राज्य पक्षी अब दुर्लभ होते जा रहे हैं। नीलकंठ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत एक संरक्षित पक्षी है।

उत्तराखंड में है नीलकंठ महादेव मंदिर-

हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के ऋषिकेश में नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहां भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं। यह मंदिर समुद्रतल से 5500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

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