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पहली बार लड़की की रजामंदी से बनाए थे शारीरिक संबंध: जैन मुनि शांति सागर

साधू शांति सागर ने आखिरकार ये काबुल कर ही लिया कि उन्होंने लड़की के साथ संबंध बनाए थे लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि लड़की की रजामंदी पर ही उसने उसके साथ संबंध बने थे उसे रेप का मामले में फंसाया जा रहा है. पुलिस ने जैन मुनि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

22 की उम्र में दीक्षा लेना शुरू किया–

बताया जा रहा है कि जैन मुनि बनने के पहले शांति सागर गिरिराज शर्मा हुआ करता था. उसने एक जैन संत के संपर्क में आने के बाद 22 की उम्र में दीक्षा ली. उसके कुछ पुराने जानकारों ने बताया कि वह संत बनने से पहले बेहद c भरी जिंदगी जीता था. दीक्षा लेने से पहले शांति सागर मध्य प्रदेश के गुना में रहता था. उसके पिता सज्जनलाल शर्मा हलवाई थे.

लड़की से पहली बार संसर्ग किया–

जैन मुनि शांति सागर ने कहा कि वह लड़की को 5-6 महीने से जानते हैं. वह पहली बार मिलने के लिए सपरिवार सूरत आई थी. टीमलियावाड नानपुरा धर्मशाला में लड़की की रजामंदी से उनके बीच शारीरिक संबंध बने थे. जीवन में पहली बार उन्हें किसी लड़की से संसर्ग किया था. डॉक्टर ने उनसे पूछा कि साधु होक ऐसा क्यों किया? इस पर मुनि ने सिर झुका लिया.

जेल में बंद जैन मुनि शांति सागर महाराज जेल का खाना नहीं खा रहा है. उसने खाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उस खाने में प्याज-लहसुन है. हालांकि, जेल प्रशासन ने उसे प्याज-लहसुन रहित खाना मुहैया कराने की कोशिश की, लेकिन खाना नहीं मिल सका.

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जैन मुनि शांति सागर अपने पिता से अलग ताऊजी के साथ गुना में रहता था. वह नए कपड़े, हेयर स्टाइल और फैशनेबल लुक के लिए दोस्तों के बीच मशहूर था. यही नहीं, उसे क्रिकेट खेलना भी पसंद था. लेकिन आगे जाकर वह साधु बन गया.

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