पौराणिक ग्रंथ भी सिखाते हैं दोस्ती का मतलब, पढ़े पूरी खबर

दोस्ती का महत्व वही लोग बता सकते हैं जो दोस्ती की अहमियत जानते हैं. ऐसे में आज हम आपको पौराणिक ग्रंथों के उन दोस्तों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में जानने और सुनने के बाद आप हैरान हो सकते हैं. पुराने समय में दोस्ती का मतलब सब कुछ होता है लेकिन आजकल लोग इस बात को सच नहीं मानते हैं. वहीं आज कल एक लड़का और लड़की दोस्त नहीं हो सकते यह नियम चल गया है लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे दोस्त जिनकी दोस्ती मिशाल बन गई.

द्रोपदी और कृष्ण- कहा जाता है एक स्त्री और पुरुष कभी दोस्त नहीं हो सकते हैं इस कारण से इस रिश्ते को संदेह की नजर से देखा जाता है.दरअसल कृष्ण और द्रोपदी हमारी पौराणिक दुनिया में मित्रता का अनुपम उदाहरण है, जो स्त्री और पुरुष के बीच है. इसी के साथ कृष्ण ने जीवन भर द्रोपदी से मित्रता निभाई फिर चाहे मामला चीरहरण का हो या महाभारत युद्ध का कृष्ण ने हमेशा ही उनसे अपनी मित्रता निभाई है.

सीता और त्रिजटा- आपको याद होगा कि रावण की अशोक वाटिका में सीता त्रिजटा से मिली. अपहरण के बाद जब सीता को रावण ने अशोक वाटिका में रखा था, तब सीता की सेवा के बहाने उनपर नजर रखने के लिए त्रिजटा को उनके साथ रखा था. धीरे-धीरे त्रिजटा और सीता के बीच मित्रता विकसित हुई. दोस्ती के कारण ही राक्षसी होकर भी त्रिजटा ने सीता का भरपूर सहयोग किया.

दूर्योधन और कर्ण- महाभारत में दुर्योधन को अधर्म का प्रतीक बताया गया है, लेकिन कर्ण के साथ दुर्योधन का रिश्ता भी दोस्ती की मिसाल है. जी हाँ, कर्ण की पृष्ठभूमि और दुर्योधन की पृष्ठभूमि को देखते हुए कर्ण को अपने बराबर लेकर आना दुर्योधन की दोस्ती निभाने का सबसे बेहतरीन उदाहरण है और चाहे दुर्योधन और कर्ण दोनों को नायक न माना जाता हो, लेकिन फिर भी दोस्ती निभाने के लिए दुर्योधन को कर्ण को याद करना ही होगा.

प्रदेश की धड़कन, 'इंडिया जंक्शन न्यूज़' के ताजा अपडेट पाने के लिए जुड़ें हमारे फेसबुक पेज से...

Check Also

नागपंचमी : जानिए सांपो से जुड़ें चौकाने वाले सच

आम जनधारणा के अनुसार सांप को बहुत ही खतरनाक जीव माना जाता है और देखते …

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com