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7 मुस्लिम देशों पर ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंधों की चौतरफा आलोचना

वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से देश में शरणार्थियों और 7 मुस्लिम बहुल देशों से आव्रजकों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने वाले आदेश की चौतरफा आलोचना हो रही है। ट्रंप की इस नीति की आलोचना करने वालों में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग भी शामिल हैं। इस आदेश के पारित हो जाने से ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन से 90 दिनों के लिए आव्रजकों और गैर शरणार्थियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाएगा।

सभी शरणार्थियों के प्रवेश पर 120 दिनों के लिए लगा प्रतिबंध खत्म हो जाएगा और मौजूदा शरणार्थियों की संख्या को 1,17,000 से घटाकर 2017 में अधिकतम 50,000 किया जाएगा। गार्जियन के मुताबिक, अमेरिकी-इस्लामिक संबंध परिषद ने शुक्रवार को कहा कि इस आदेश को चुनौती देते हुए मुकदमा दाखिल किया जाएगा, क्योंकि इस आदेश का उद्देश्य मुस्लिम बाहुल्य देशों से इस्लामिक लोगों के प्रवेश को अमेरिका में प्रतिबंधित करना है।

सीएआईएआर की लीना एफ.मसारी ने कहा, ‘इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि हमारे देश में प्रवेश करने वालों में शरणार्थियों को गहन जांच के बाद ही प्रवेश मिलता है और ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। यह आदेश वास्तिवकता पर नहीं, बल्कि भ्रम पर आधारित है।’ विश्व की सबसे युवा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला का कहना है कि वह आहत हैं कि अमेरिका ने शरणार्थियों और आव्रजकों का स्वागत करने वाले अपने गौरवान्वित इतिहास से मुंह मोड़ लिया है।

इन्हीं लोगों ने अमेरिका के निर्माण में मदद की और ये नई जिंदगी के लिए निष्पक्ष अवसर मिलने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं। मलाला ने आगे लिखा, ‘मैं आहत हूं कि उन सीरियाई शरणार्थी बच्चों के लिए, जिन्होंने युद्ध के छह वर्षों के दौरान दुख व तकलीफें झेलीं, जबकि इस पूरे प्रकरण में उनका कोई दोष नहीं।’ फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि ट्रंप द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए कार्यकारी आदेशों के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।

जकरबर्ग ने कहा कि उनके पूर्वज जर्मनी से अमेरिका, ऑस्ट्रिया और पोलैंड से अमेरिका आकर बस गए थे और उनकी पत्नी के पिता चीन और वियतनाम के शरणार्थी हैं। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका आव्रजकों का देश है और हमें इस पर गर्व है।’ खीजर खान ने कहा, ‘ट्रंप द्वारा मुसलमानों और आव्रजकों को निशाना बनाने के लिए संवैधानिक सिद्धांतों और मौलिक अमेरिकी मूल्यों का उल्लंघन करना बेहद चिंता का विषय है।’

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