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बिजली कंपनियो के लिए आरंभ की गई उदय योजना में झारखंड बिजली वितरण निगम डूबा

झारखंड-  बिजली वितरण निगम कंपनी भारी घाटे में चल रही है. हर महीने कंपनी को ढाई सौ करोड़ रुपए से अधिक का घाटा झेलना पड़ रहा है. यानि आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैय्या की कहावत निगम पर सटीक बैठती है. यह स्थिति तब है जब झारखंड केंद्र सरकार द्वारा बिजली कंपनियाें को घाटे से उबारने के लिए आरंभ की गई उदय योजना का लाभ ले रहा है.

उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचाने के लिए 2100 मेगावाट बिजली की दरकार होती है. डीवीसी से 4.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से 700 मेगावाट बिजली  ली जाती है. वितरणनिगम द्वारा अभी हर माह 450 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी जाती है. इसके एवज में राजस्व वसूली केवल 225 से 230 करोड़ रुपए की होती है.

झारखंड केंद्र सरकार द्वारा बिजली कंपनियाें को घाटे से उबारने के लिए आरंभ की गई उदय योजना का लाभ ले रहा है. इस योजना का लाभ लेने वाला झारखंड पहला राज्य है.  इस योजना के तहत बिजली कंपनियों को भारी बकाए पर दिए जा रहे ब्याज से मुक्त कराने सितंबर 2015 में झारखंड वितरण निगम लिमिटेड इस योजना में शरीक हुआ था. योजना के तहत जनवरी 2016 में 5553 करोड़ रुपए केंद्र से बतौर लोन मिला था. इस रकम से निगम ने डीवीसी का 4770 करोड़ रुपए और कोल इंडिया के 783 करोड़ रुपए का भुगतान किया था. बावजूद इसके निगम के सिर पर डीवीसी का 1500 करोड़ रुपया बकाया है. वहीं कोल इंडिया की 83 करोड़ रुपए की उधारी निगम के सिर पर है.

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