ब्रिक्स में लश्कर-जैश का मुद्दा नहीं उठा सका भारत

pti10_16_2016_000247a_147गोवा.यहां 8th ब्रिक्स समिट रविवार को खत्म हो गया। दो दिन के समिट में भारत का पूरा जोर आतंकवाद के मुद्दे पर रहा। नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम न लिए बगैर कई बार तीखा हमला बोला। लेकिन चीन की वजह से ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लेरेशन में सीमा पार आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का जिक्र करने पर सहमति नहीं बन पाई।
ब्रिक्स देशों ने उड़ी हमले की निंदा की...
– भारत के फॉरेन सेक्रेटरी अमर सिन्हा ने बताया- “ज्वाइंट डिक्लेरेशन में ब्रिक्स देशों के बीच लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के जिक्र पर आम सहमति नहीं बन सकी।”
– “रूस, चीन, ब्राजील और साउथ अफ्रीका ने उड़ी हमलों की निंदा की। इन देशों ने बाइलेटरल और इंटरनेशनल, दोनों लेवल पर आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ने पर सहमति जताई है।”
क्यों नहीं लिया गया लश्कर और जैश का नाम
– अमर सिन्हा ने बताया कि उनका मानना है कि पाकिस्तान के ये आंतकी संगठनों का निशाना भारत है, इसलिए ब्रिक्स के दूसरे देशों के लिए चिंता की बात नहीं है। शायद इसलिए इनका नाम शामिल नहीं किया। इंटरनेशनल आतंकी संगठन जैसे इस्लामिक स्टेट और जबात-अल-नुसरा का ज्वाइंट डिक्लेरेशन में जिक्र किया गया।
– उन्होंने बताया – “डिक्लेरेशन में आईएसआईएस और दूसरे आतंकी संगठनों के नाम हैं। मैं समझता हूं कि उन आतंकवादी संगठनों का नाम लिया गया है, जिन्हें यूएन ने बैन किया है।”
– “यह अहम है कि भारत अपने विचारों से सभी को साथ लाने में सफल रहा है। ज्वाइंट डिक्लेरेशन में सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है।”
सीसीआईटी पर सहमति बनी
– ब्रिक्स देशों ने कॉम्प्रिहेन्सिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (सीसीआईटी) को तेजी से अपनाने की बात कही। बता दें कि भारत ने 1996 में यूनाइटेड नेशन्स में पहल की थी।
मोदी ने कहा था- आतंकवाद पड़ोसी का दुलारा बच्चा, इसे पालने वाला आतंकियों जितना ही खतरनाक
– नरेंद्र मोदी ने दो दिन के समिट में सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान पर कई बार हमला बोला।
– रविवार सुबह कहा- “हमारा एक पड़ोसी देश आतंकवाद को पालने-पोसने में लगा है।”
– शाम को कहा- “आतंकवाद हमारे पड़ोसी देश का दुलारा बच्चा बन गया है और अब यही बच्चा अपने मां-बाप के नेचर के बारे में बता रहा है।”
– इससे पहले, मोदी ने चारों देशों (ब्राजील, रूस, चीन और साउथ अफ्रीका) के प्रमुखों के साथ मीटिंग की।
– बाद में मीडिया को ऐड्रेस करते हुए कहा- “जो हिंसा और आतंक की ताकतों को सपोर्ट देते हैं, पनाह देते हैं, उनकी मदद करते हैं, वे हमारे लिए आतंकवादियों जितने ही खतरनाक हैं।”

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