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भारत के हित में साबित होगी ट्रंप की ऊर्जा नीति….

भारत सरकार भी ट्रंप की इस ऊर्जा नीति से खासी उत्साहित है क्योंकि उनका आकलन है कि इससे भारत को ज्यादा फायदा ही होने वाला है।
नई दिल्ली। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले अपनी ऊर्जा नीति का प्लान पेश किया है। पिछले पांच वर्षो में भारत अमेरिका का सबसे अहम ऊर्जा साझेदार देश बन गया है उसे देखते हुए जानकारों का मानना है कि ट्रंप की ऊर्जा नीति का भारत पर परोक्ष और प्रत्यक्ष तौर पर कई तरह से असर पड़ेगा। भारत सरकार भी ट्रंप की इस ऊर्जा नीति से खासी उत्साहित है क्योंकि उनका आकलन है कि इससे भारत को ज्यादा फायदा ही होने वाला है। ट्रंप के ऊर्जा प्लान में कहा गया है कि अमेरिका अपने ऊर्जा स्त्रोतों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेगा और घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगा। साथ ही इसमें दशकों पुरानी नीति को पूरी तरह से बदलते हुए कोयला उत्पादन को भी बढ़ाने की बात है। देश के प्रमुख ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, ”इसका सीधा सा मतलब यह है कि कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाने की सऊदी अरब और रूस की साजिश नहीं चलेगी।  पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व गैस की कीमतों को कम करने में अमेरिका में क्रूड व शेल गैस के उत्पादन के बढ़ाने की अहम भूमिका रही है। अब अमेरिका अपने उत्पादन स्तर को और बढ़ाएगा और साथ ही इनका निर्यात भी करेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों को नीचे रहने में मदद मिलेगी और जाहिर है कि इससे सबसे ज्यादा फायदा भारत जैसे बड़े तल आयातक देश को होगा।” देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी ओएनजीसी के पूर्व सीएमडी आर एस शर्मा भी मानते हैं कि ट्रंप की नीति भारतीय इकोनोमी के लिए अच्छी खबर है। उनके मुताबिक पिछले तीन महीने में कच्चे तेल की कीमतों 9 डॉलर प्रति बैरल बढ़ चुकी हैं। तेल उत्पादक देशों की कोशिश है कि क्रूड को और महंगा किया जाए। लेकिन ट्रंप की घोषणा के बाद क्रूड को महंगा करने में जुटी ताकतों पर अंकुश लगेगा। सनद रहे कि भारत व अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षो से ऊर्जा के हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर इनर्जी डायलॉग का आयोजन होता है। इसमें दोनों देशों के ऊर्जा मंत्री अगुवाई करते हैं। इसमें सहयोग के लिए दोनों देशों ने कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, बिजली व इनर्जी कुशलता, सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा पर छह उप-समितियां गठित की हुई हैं। भारत अमेरिका इनर्जी डायलॉग से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक ट्रंप के इनर्जी प्लान में वे सभी बाते हैं जो भारत को प्रभावित करती हैं। मसलन, इसमें शेल गैस उत्पादन को बढ़ाने व कोयला खनन के लिए पर्यावरण अनुकूल तकनीकी की बात है। जबकि इन दोनों क्षेत्रों में भारत व अमेरिका के बीच करीबी सहयोग स्थापित करने पर सहमति हो चुकी है। इनर्जी डायलॉग में भारत के बिजली व कोयला मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से अमेरिका से दो तरह की मांग रखी थी। पहला सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी के पुराने ताप बिजली घरों को आधुनिक बनाने में मदद और दूसरा गैस हाइड्रेट से जुड़ी तकनीक। अमेरिका ने इसे देने का वादा किया था। अब देखना होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप ओबामा प्रशासन के वादे को पूरा करते हैं या नहीं।

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