Breaking News

मनमानी के कारण बिगड़े जेयू के हालात, पड़ा दो लाख से ज्यादा छात्रों पर असर!

ग्वालियर- जीवाजी यूनिवर्सिटी से चार सौ से ज्यादा सरकारी व निजी कॉलेज जुड़े हैं। उनमें दो लाख से ज्यादा छात्र हैं। छात्र इस उम्मीद से प्रवेश लेते हैं कि  समय पर परीक्षा होगी और रिजल्ट आएंगे। लेकिन जेयू इस पर खरा नहीं उतर पा रहा है। पिछले पांच साल की गतिविधियों पर ही यदि नजर डाले तो संबद्धता, परीक्षा और रिजल्ट में जेयू के हालात काफी बिगड़े हुए हैं। जेयू के साथ ही शासन की लचर व्यवस्था कॉलेज संचालकों के लिए फायदे का सौदा रही है। जेयू नियमों का सख्ती से पालन नहीं करता। इसका लाभ कॉलेजों को होता है। वे अदालत का सहारा लेते हैं। जेयू व शासन ठोस जबाव पेश नहीं कर पाता जिससे उन्हें राहत मिल जाती है।

बीएड और एमएड के मामले इस लचर व्यवस्था को उजागर करने के लिए काफी हैं। जेयू को सबसे अधिक बदनामी इन्हीं दो पाठ्यक्रमों ने दी है। अंचल में 170 बीएड और एक दर्जन एमएड कॉलेज हैं। पिछले सालों सें सबसे ज्यादा विवाद इन्हीं पाठ्यक्रमों का रहा। बीएड में प्रवेश के लिए प्रदेश के 75 व अन्य राज्यों के छात्रों का 25 फीसदी कोटा रहता है। लेकिन ज्यादातर कॉलेज संचालकों ने बाहरी राज्यों के छात्रों को ज्यादा प्रवेश दिए। कई कॉलेजों में पर्याप्त स्टाफ व इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। इस मामले में जेयू ने सख्ती दिखाई तो कुछ कॉलेज संचालक अदालत पहुंचे। जेयू मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका और परीक्षा कराना पड़ी। दो साल से शासन ने ऑनलाइन प्रलेश प्रक्रिया शुरू कर दी है इसलिए मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगा है।

इसी तरह एमएड का सत्र 2013-14 का मामला अब तक नहीं निपटा है। जेयू ने काउंसलिंग कर कॉलेजों में छात्रों के प्रवेश करा दिए थे लेकिन इसी बीच एनसीटीई ने नैक से निरीक्षण न कराने पर मान्यता वापस ले ली थी। इस पर शासन ने उसे जीरो सत्र घोषित कर दिया। इसके विरोध में कॉलेज संचालकों ने छात्रों को अदालत भेज दिया। अदालत ने परीक्षा कराने के निर्देश दिए और प्रत्येक छात्र को 1-1 लाख रुपए हर्जाना देने को कहा। जेयू ने याचिका लगाने वाले 5 छात्रों को यह राशि दे दी। इस सत्र में प्रवेश लेने वाले 176 छात्रों की परीक्षा नहीं हुई है। कॉलेज संचालक अब भी परीक्षा कराने का प्रयास कर रहे हैं।

नर्सिंग के मामले भी कोर्ट में

केवल संबद्धता का ही नहीं, परीक्षा परिणाम को लेकर भी छात्रों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। रिजल्ट में काफी गड़बड़ियां हुई हैं। पिछले साल बीएससी नर्सिंग के छात्रों को अदालत की शरण लेना पड़ी थी। अदालत के आदेश पर कॉपियां फिर से चेक कराई गई जिसमें बड़ी संख्या में छात्र पास हुए थे।

कॉलेजों पर कार्रवाई नहीं

नियमों को ताक पर रखने वाले कॉलेजों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती। कार्यपरिषद की बैठक से पहले तक उनकी संबद्धता रोकने या परीक्षा न कराने के निर्णय होते हैं। मामला कार्यपरिषद में पहुंचते ही शर्तें पूरी करने का कॉलेजों को केवल नोटिस देने का निर्णय होता है। ताजा मामला वर्तमान सत्र 2017-18 में प्रवेश का है। एक दर्जन कॉलेजों ने रोक के बाद भी 523 छात्रों को प्रवेश दे दिए। मीडिया ने मामले का खुलासा किया तो जेयू ने छात्रों को दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट कर दिया लेकिन मनमानी करने वाले कॉलेजों को अब तक नोटिस तक जारी नहीं हो सके हैं।

इनका कहना है

संबद्धता, परीक्षा और परिणाम के मामलों में लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। नियमों के पालन में हमने सख्ती बरती है। रोक के बाद प्रवेश देने के मामले में हम कॉलेजों को जल्द ही नोटिस जारी कराएंगे। किसी को कोई राहत नहीं दी जाएगी।

प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति, जेयू

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*