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माई पीतांबरा के दरबार में पहुचे 200 से ज्यादा नेता पहुंचे

दतिया । ‘जय माई की…।’ दतिया के पीतांबरा पीठ में मां का यह जयकारा इस नवरात्र कुछ ज्यादा ही जोर से गूंज रहा है। लेकिन इस जयकारे में आस्था से ज्यादा सत्ता की चाहत साफ झलक रही है। मां पीतांबरा राजसत्ता की देवी जो मानी जाती हैं। उप्र में सरकार बनाने के लिए जितनी सीटों की जरूरत है, कम से कम उतने नेता तो यहां मत्था टेक ही चुके हैं।

पिछले छह महीने में ही 200 से ज्यादा सपा-भाजपा के उम्मीदवार यहां हाजिरी लगा चुके हैं। जो नहीं आए, उनके नाम के अनुष्ठान चल रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने वाले तक शामिल हैं। हालांकि कांग्रेस और बसपा नेता वरदान मांगने की इस दौड़ शामिल नहीं हैं।

पीतांबरा देवी के दरबार में पौराणिक से ज्यादा प्रामाणिक किस्से गूंजते हैं। सत्ता में आने और बने रहने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और एचडी देवेगौड़ा से बात शुरू होती है तो उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आकर रुकती है।

कहा जा रहा है कि वो भी विशेष अनुष्ठान करवा रहे हैं। बाहुबली राजा भैया का भी तीन बार संदेश आ चुका है। भाजपा से मुख्यमंत्री पद के दो दावेदार स्वतंत्रदेव सिंह के आने और योगी आदित्यनाथ के नाम से गुप्त अनुष्ठान की चर्चा है। 11 से 40 दिन तक चलने वाला अनुष्ठान गोपनीय होता है। इसलिए कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

इन्होंने टेका मत्था

सपा – सपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, उप्र के उच्च शिक्षा मंत्री शारदा प्रसाद शुक्ला, ग्रामीण विकास मंत्री अरविंद सिंह गोप व अन्य।

भाजपा – कलराज मिश्र, मनोज सिन्हा, महेश शर्मा, गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह, केशव मौर्य, ओम माथुर, रामपति त्रिपाठी।

खुलासा नहीं कर सकते

राजसत्ता की देवी के दरबार में कौन नेता किस संकल्प के साथ आता है, यह खुलासा नहीं कर सकते। आम आदमी की तरह वे भी अनुष्ठान करवा सकते हैं।

महेश दुबे, व्यवस्थापक, पीतांबरा पीठ

मप्र से बाबूलाल-लक्ष्मीकांत पहुंचे

इस नवरात्रि में मध्यप्रदेश के नेताओं की संख्या पहले के मुकाबले कम है। अब तक बाबूलाल गौर और लक्ष्मीकांत शर्मा ही पहुंचे हैं। बीते छह महीने में यशोधरा राजे, जयभान सिंह पवैया, माया सिंह, कैलाश विजयवर्गीय यहां आ चुके हैं। वसुंधरा राजे और माया सिंह भी आने वाली हैं।

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