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18 साल पहले हिरण शिकार के केस में हथियार को लेकर के सलमान ने किया बड़ा खुलासा

जोधपुर.हिरण शिकार से जुड़े 18 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में सलमान खान को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया है। बता दें कि 1998 में हुए इस शिकार मामले में सलमान के खिलाफ चार केस चल रहे हैं। इनमें से दो में उन्हें हाईकोर्ट से बरी किया जा चुका है। जबकि एक अन्य मामले की सुनवाई जोधपुर कोर्ट में 25 जनवरी को है।

तब सीधे जेल जाएंगे सलमान…

11:45 AM- सलमान खान को बरी किया गया।

11:40 AM-सलमान खान कोर्ट पहुंचे।

– सलमान के खिलाफ बुधवार को आर्म्स एक्ट मामले में फैसला सुनाया जाएगा।
– उनके ऊपर बिना वैलिड लाइसेंस के हथियार रखने और उनका गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।
– अगर बगैर वैलिड लाइसेंस हथियार रखने का आरोप साबित होता है तो सलमान को 3 साल की सजा होगी।
– हथियारों को रखने के साथ उनका गलत इस्तेमाल करने का आरोप साबित हुआ तो 7 साल तक की सजा हो सकती है।
– अगर सलमान को 3 साल से ज्यादा की सजा होती है तो उन्हें कोर्ट से सीधे जेल जाना होगा।
– 3 साल से कम सजा होने पर उन्हें इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने और जमानत लेने का वक्त दिया जाएगा।

जोधपुर पहुंचे सलमान
– नियम के मुताबिक फैसला आरोपी को ही पढ़कर सुनाया जाता है, इसलिए बुधवार को सलमान को कोर्ट में मौजूद रहना होगा।
– इसके लिए सलमान जोधपुर पहुंच चुके हैं। उनके साथ बहन अलवीरा भी आई हैं।

 

शिकार के 3 और आर्म्स एक्ट का 1 मामला
– 1998 में “हम साथ-साथ हैं” फिल्म की शूटिंग के दौरान सलमान खान पर 3 अलग-अलग जगहों पर हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा।
– जोधपुर के पास भवाद गांव में 2 काले हिरणों, घोड़ा फार्म में 1 काले हिरण और कांकाणी गांव में 2 काले हिरणों का शिकार किया गया था।
– भवाद और घाेड़ा फॉर्म में हुए शिकार के मामले में लोअर कोर्ट ने सलमान को 1 साल और 5 साल की सजा सुनाई थी।
– बाद में हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में सलमान को बरी कर दिया। अब इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
– सलमान पर आरोप है कि उन्होंने हिरणों के शिकार में जिन पिस्टल और राइफल का इस्तेमाल किया उनके लिए जारी लाइसेंस की तारीख खत्म हो चुकी थी।
– ऐसे में सलमान के खिलाफ गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने और उनसे शिकार करने का एक अलग से मामला चल रहा है।

 

सैफ, तब्बू, नीलम, सोनाली पर क्या हैं आरोप?
– कांकाणी गांव में जिस वक्त हिरणों का शिकार हुआ, सलमान के साथ सैफ अली खान, सोनाली बेन्द्रे, तब्बू और नीलम भी मौजूद थे।
– सलमान पर हिरणों को गोली मारने का और सैफ समेत तीनों एक्ट्रेस पर उन्हें उकसाने का आरोप है।
– इस मामले में 25 जनवरी को सभी आरोपियों को मुलजिम बयान सुनाए जाएंगे।

मामले का पता कैसे चला
– 1 अक्टूबर 1998 की रात सलमान पर कांकाणी गांव की सरहद में दो काले हिरणों के शिकार का आरोप लगा।
– गोली की आवाज सुनकर गांव वाले जाग गए। सलमान अपनी जिप्सी में सैफ, सोनाली, नीलम और तब्बू के साथ भाग निकले।
– गांव वालों ने 2 काले हिरण बरामद किए। दोनों हिरण की गोली लगने के कारण मौत हो चुकी थी।

 

8 दिन पहले ही लाइसेंस की तारीख खत्म हुई थी
– सलमान खान की रिवाॅल्वर व राइफल के लाइसेंस की तारीख 22 सितंबर 1998 तक थी। उन पर 1 अक्टूबर को शिकार करने का आरोप लगा।
– इसके बाद 15 अक्टूबर को सलमान के कहने पर हथियार मुंबई से लाकर जोधपुर में पुलिस के सामने पेश किए गए।
– 22 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच हथियार गुम या चोरी होने की रिपोर्ट नहीं है। यानी कानूनन यही माना जाएगा कि हथियार सलमान के पास ही थे, चाहे हथियार कहीं भी रखे हों।
– अगर हथियार किसी दूसरे के कब्जे में थे तो यह सलमान को ही साबित करना था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।
– प्रॉसिक्युशन ने इस मामले में कुल 28 गवाहों के बयान करवाए थे।

 

प्रॉसिक्यूशन ने कहा- आरोप झूठा साबित नहीं कर पाए सलमान

– 22 सितंबर 1998 को हथियारों के लाइसेंस की तारीख खत्म हो चुकी थी। बाद में उसे रिन्यु की तारीख से वैलीड माना जाएगा, ग्रेस पीरियड शामिल नहीं होगा
– 29 सितंबर 1998 को रिवाॅल्वर गुम होने की सूचना पुलिस को दी थी, वही रिवॉल्वर उसी दिन उम्मेद भवन के बाथरूम में बेडशीट में लिपटी मिली।
– 1 और 2 अक्टूबर 1998 की रात में काले हिरणों के शिकार में इन हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
– सलमान के कहने पर उदय राघवन ने 15 अक्टूबर 1998 को रिवाॅल्वर/राइफल मुंबई से लाकर जोधपुर में पुलिस के सामने पेश किए।
– लाइसेंस की तारीख खत्म होने के बाद और पुलिस के सामने पेश करने के बीच हथियार सलमान के कब्जे में नहीं थे, यह साबित करने का भार सलमान पर था। लेकिन सलमान की ओर से ऐसे साक्ष्य पेश नहीं हुए।
– पोस्टमार्टम रिपोर्ट में काले हिरणों की मौत गन शॉट व सदमे से होना बताया गया है।
– इसमें चश्मदीद गवाह छोगाराम व शेराराम, पुलिसकर्मी सत्यमणि तिवारी, तब के एएसपी अशोक पाटनी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने वाले डॉ. गणपत सिंह और मुंबई के एसीपी विजयनारायण पंडित समेत प्रॉसिक्युशन की मंजूरी देने वाले जोधपुर के कलेक्टर रहे रजतकुमार मिश्र के बयान लिए गए।

 

बचाव पक्ष का तर्क- पुलिस के कहने पर हथियार मुंबई से मंगवाए थे
– सलमान के पास 30 सितंबर 1998 तक गुजरात और राजस्थान में हथियारों का ट्रांजिट परमिट था, बाद में 22 दिसंबर 2012 तक रिन्यू करवा दिया गया था।
– हथियार गुम होने की रिपोर्ट व तलाशी कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं है। गैर-कानूनी हथियार जब बाथरूम में मिला तब 29 सितंबर 1998 को कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
– किसी भी गवाह से हथियारों की पहचान नहीं करवाई कि 1-2 अक्टूबर 1998 को शिकार में इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हुआ। पुलिस के कहने पर उदय राघवन ने हथियार मुंबई से लाकर जोधपुर में पेश किए, हथियार सलमान के कब्जे में नहीं थे।
– पोस्टमार्टम की पहली रिपोर्ट में डॉक्टर नेपालिया ने हिरणों की मौत कुत्तों के काटने से होना बताया। गवाहों के बयानों में बड़ा फर्क है।

 

 

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