केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

आर्थिक पैकेज की तीसरी किस्त में किसे क्‍या मिला? पढ़िए वित्त मंत्री की बड़ी घोषणाएं

नई दिल्‍ली। केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज के बारे में जानकारी देने के लिए शुक्रवार को भी मीडिया से मुखातिब हुईं। वित्‍त मंत्री की ये तीसरी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस थी और यह पूरी तरह से किसानों पर केंद्रित थी। इस दौरान उन्‍होंने कृषि क्षेत्र के लिए 11 ऐलान किए गए, जिनमें 8 फैसले कृषि और इंफ्रा से जुड़े थे, जबकि 3 फैसले गवर्नेंस और रिफॉर्म के हैं।

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प्रेस वार्ता के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज की घोषणाएं कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर हैं। भारत की जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। किसानों के कल्याण पर काम हो रहा है। पिछले 5-6 साल में कई कदम उठाए गए हैं।

वित्त मंत्री द्वारा की गई बड़ी घोषणाएं:

  • किसानों की निश्चित आय, जोखिम रहित खेती और गुणवत्ता के मानकीकरण के लिए एक कानून बनाया जाएगा। इस फायदा ये होगा कि किसानों का उत्पीड़न रुकेगा और किसानों के जीवन में सुधार आएगा।
  • एक केंद्रीय कानून आएगा, जिससे किसान अपने उत्पाद को आकर्षक मूल्य पर दूसरे राज्यों में भी बेच सकें। अभी वह सिर्फ लाइसेंसी को ही बेचा जा सकता है। अगर वह किसी को भी बेच सके तो उसे मनचाही कीमत मिलेगी। हम उसे ऐसी सुविधा देंगे।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया जाएगा ताकि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम मिल सके। 1955 में ये एक्ट बनाया गया था। खाद्य प्रसंस्करण में स्टॉक लिमिट नहीं होगा। इस बदलाव से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। तिलहन, अनाज, प्‍याज, आलू जैसे उत्पादों को अनियमित किया जाएगा। राष्ट्रीय आपदा के दौरान जब दाम में 100 फीसदी वृद्धि होती है तो ऐसे हालात में ही स्टॉक नियम लागू किया जाएगा।
  • लॉकडाउन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद के लिए 74,300 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। प्रधानमंत्री किसान फंड के तहत 18,700 करोड़ रुपये पिछले दो महीने में किसानों के खाते में डाले गए हैं।
  • लॉकडाउन के दौरान दूध की मांग में 20-25 फीसदी की कमी आई। प्रतिदिन खपत 360 लाख लीटर की जगह हमने 560 लाख लीटर दूध खरीदा। इस योजना से किसानों को लाभ मिला। उन्हें दो फीसदी अनुदान दिया गया। दो करोड़ किसानों को ब्याज सब्सिडी के तहत 5 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिला है।
  • मत्स्य पालन के क्षेत्र में कोविड-19 की सभी चार घोषणाओं को लागू किया गया। दो महीने मे 242 नई श्रिम्प हैचरी को अनुमति दी गई।
  • कृषि आधारभूत ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपये की योजना लाई जा रही है। इसके तहत कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे, जिससे भंडारण क्षमता बढ़ेगी। किसानों की भी आमदनी बढ़ेगी। इसका लाभ किसान संघों, उद्यमियों और स्टार्ट अप को मिलेगा।
  • दो लाख सूक्ष्म इकाइयों को मदद पहुंचाने की योजना। तकनीक में सुधार और मार्केटिंग से लाभ पहुंचाया जाएगा। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये की योजना लाई जा रही है। इससे रोजगार और आय के साधन बढ़ेंगे। क्लस्टर के माध्यम से तकनीक व ब्रांडिंग बढ़ाने की योजना है। जिस तरह से बिहार में मखाना है, यूपी में आम है, कर्नाटक में रागी है, तेलंगाना में हल्दी है, कश्मीर में केसर है, नॉर्थ ईस्ट में बांस व हर्बल प्रोडक्ट है, लोकल से ग्लोबल नीति के तहत इन्हें बढ़ावा दिया जाएगा।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछुआरों के लिए 20 हजार करोड़ की योजना लाई जा रही है। 11 हजार करोड़ रुपये समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के लिए दिया जाएगा। 9 हजार इसके आधारभूत ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा। योजना से 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
  • 53 करोड़ मवेशियों के टीकाकरण की योजना। मवेशियों में मुंह पका खुर पका बीमारी (फुट एंड माउथ) से निपटने के लिए 13,343 करोड़ रुपये की योजना लाई गई है। इसके तहत 53 करोड़ गायों, भैंसों, सूअर, बकरी, भेड़ का 100 फीसदी टीकाकरण किया जाएगा। अभी तक 1.5 करोड़ गाय व भैंसों का टीकाकरण हुआ है।
  • पशुपालन व डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 15 हजार करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई जाएगी। इसके तहत मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जा सकेगी।
  • हर्बल पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 4,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इन पौधों की ग्लोबल डिमांड है। लगभग 10 लाख हेक्टेयर में हर्बल प्रोड्क्टस की खेती होगी। इससे 5,000 करोड़ की आय किसानों को होगी। गंगा के किनारे 800 हेक्टेयर भूमि पर हर्बल प्रोडक्ट्स के लिए कॉरिडोर बनाया जाएगा।
  • टॉप टू टोटल योजना में 500 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सप्लाई चेन नहीं होने की वजह से किसान अपनी फसल को बाजार में बेच नहीं पाता। पहले ये योजना टमाटर, आलू, प्याज के लिए लागू थी। अब 6 महीने के लिए बाकी सब्जियों पर भी इस योजना को लागू किया जा रहा है। जो खाद्य पदार्थ खराब हो जाते थे या किसान को कम मूल्य पर बेचना पड़ता था, इस योजना से किसानों को लाभ मिलेगा। मालभाड़े पर 50 फीसदी सब्सिडी और स्टोरेज पर 50 फीसदी सब्सिडी मिलेगी।
  • मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता। इससे मधुमक्खी पालन के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा। इससे 2 लाख पालकों की आय बढ़ेगी।

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