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2018-19 का आम बजट नही रहेगा लुभावना….जाने क्यों

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि जुलाई से सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े ग्रोथ में गिरावट के रुख के उलट स्थिति (सुधार) का संकेत देते हैं। आपको बता दें कि बीती पांच तिमाहियों में गिरावट के बाद सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.3 फीसद पर आ गई थी जो कि जून तिमाही में 5.7 फीसद रही थी जो कि बीते तीन सालों का सबसे निचला स्तर था।

जेटली की अर्थशास्त्रियों के  साथ बैठक क्यों रही खास

अर्थशास्त्रियों के साथ पूर्व-बजट परामर्श बैठक के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार राजकोषीय समेकन के रोड मैप का अनुसरण कर रही है जिसके तहत 2015-16 में राजकोषीय घाटा 3.9 फीसद पर था, साल 2016-17 में 3.5 फीसद था और वित्त वर्ष 2017-18 के लिए इसके 3.2 फीसद होने का अनुमान है। इस बैठक के दौरान अर्थशास्त्रियों ने आगामी बजट के लिए अपनी तरफ से तमाम सुझाव दिए हैं, जिसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन में इजाफे के साथ ही कॉर्पोरेट टैक्स को कम कर 20 फीसद के स्तर पर लाना प्रमुख रुप से शामिल है।

 

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दिग्गज अर्थशास्त्री जीन ड्रीज ने कहा, “सोशल सिक्योरिटी पेंशन की राशि 200 रुपये प्रति महीना है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इस राशि को इतना कम रखने की कोई वाजिब वजह नहीं है। इसे कम से कम 500 रुपये करना चाहिए, मेरा मानना है कि यह राशि 1000 रुपये होनी चाहिए और हो सके तो इसकी कवरेज भी बढ़ानी चाहिए।

अगला बजट नही होगा लुभावना

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य रतिन रॉय का मानना है कि केंद्र सरकार की ओर से पेश किया जाने वाला अगला आम बजट लोक लुभावन नहीं होगा और यह और खर्च की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करेगा। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता है कि केंद्र सरकार कोई लोक-लुभावन बजट लाएगी। सरकार एक जिम्मेदार बजट पेश करने की कोशिश करेगी, जिसमें खर्च की गुणवत्ता और वादों पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। मुझे नहीं लगता कि सरकार बजट को लोकलुभावन बनाने का प्रयास करेगी। मुझे पूरा भरोसा है कि राजनीति से जुड़े लोग भी इसे अच्छे से समझेंगे।”

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आम बजट 2018-19 की तैयारियों में जुटी सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों की बजट से अपेक्षाओं और सुझावों पर चर्चा शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ ही शुरु हुई। वित्त मंत्री से मिलने नॉर्थ ब्लॉक पहुंचे कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन के महासचिव बी. दसरथ रामी रेड्डी ने कहा कि किसानों, बटाईदारों और कृषि श्रमिकों के लिए आय सुरक्षा कानून बनाने की जरूरत है। रेड्डी ने कहा कि वर्ष 2012 में किसानों की औसत मासिक आय करीब 1600 रुपये थी जो जीवन निर्वाह करने के लिए मामूली है। इसलिए देश के कृषक समुदाय की मांग है कि आय सुरक्षा कानून बनाया जाना चाहिए।

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