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CCI ने गुटबंदी करने के लिए 7 सीमेंट कंपनियों पर 206 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया

नई दिल्ली
कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने गुटबंदी करने के लिए सात सीमेंट कंपनियों पर लगभग 206 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। हरियाणा सरकार की एक एजेंसी की ओर से 2012 में दिए गए टेंडर को लेकर कॉम्पिटिशन से जुड़े नॉर्म्स का उल्लंघन करने के लिए श्री सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, जयप्रकाश असोसिएट्स, जेके सीमेंट, अंबुजा सीमेंट, एसीसी और जेके लक्ष्मी सीमेंट पर जुर्माना लगाया गया।

CCI ने कहा कि अन्य प्रमाणों के साथ सीमेंट कंपनियों के एग्जिक्युटिव्स के बीच विशेष अवधि के दौरान हुई कॉल्स और एसएमएस से भी गुटबंदी की पुष्टि होती है। यह पहली बार नहीं है कि जब सीमेंट कंपनियों को CCI ने दंडित किया है। इससे पहले भी प्रतिस्पर्धा विरोधी कारोबारी तरीके अपनाने के लिए सीमेंट कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।

CCI ने गुरुवार को अपने 120 पेज के ऑर्डर में कहा कि सात सीमेंट कंपनियों ने कॉम्पिटिशन से जुड़े नॉर्म्स का उल्लंघन किया है। CCI ने इन कंपनियों को ऐसी गतिविधियों से बचने का भी निर्देश दिया है। CCI ने इन कंपनियों में से प्रत्येक के तीन फाइनैंशल इयर के ऐवरिज टर्नओवर के 0.3% के समान जुर्माना लगाया है। कुल जुर्माना लगभग 206 करोड़ रुपये का है। अल्ट्राटेक को 68.30 करोड़ रुपये, जबकि जयप्रकाश असोसिएट्स को 38.02 करोड़ रुपये का जुर्माना चुकाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा श्री सीमेंट पर 18.44 करोड़ रुपये, जे के सीमेंट पर 9.26 करोड़ रुपये, अंबुजा सीमेंट पर 29.84 करोड़ रुपये, एसीसी पर 35.32 करोड़ रुपये और जे के लक्ष्मी सीमेंट पर 6.55 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है।

माना जा रहा है कि काला धन रखने वालों ने लॉन्ड्रिंग के लिए कई रास्ते अपनाए होंगे। नोटबंदी से को-ऑपरेटिव बैंकों को अलग रखा गया था। हालांकि, एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट की ऐसी कई रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें नोटबंदी के बाद को-ऑपरेटिव और दूसरे बैंकों में बड़ी संख्या में बैंक खाते खोलने और उनमें रकम जमा कराए जाने का जिक्र है।

आरबीआई ने अब तक यह नहीं बताया है कि नोटबंदी के बाद पुरानी करेंसी में कितना पैसा बैंकों में जमा कराया गया है। वह इस डेटा की जांच कर रहा है। रिजर्व बैंक को इसमें डबल काउंटिंग और नकली करेंसी का भी पता लगाना है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल बुधवार को वित्तीय मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने डिपॉजिट के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया।

नोटबंदी का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को किया था। उन्होंने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों में 15.44 लाख करोड़ रुपये की रकम को अमान्य घोषित किया था। सरकार ने पुराने नोट बैंकों में जमा कराने के लिए 30 दिसंबर की डेडलाइन दी थी। बैंकों से हर उस खाते की जानकारी मांगी गई है, जिसमें 9 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच 2.5 लाख रुपये से अधिक रकम जमा की गई है। वहीं, किसी खाते में साल में 10 लाख रुपये से अधिक रकम जमा होने और क्रेडिट कार्ड बकाया के लिए 1 लाख रुपये के कैश पेमेंट की डिटेल भी मांगी गई है। अधिकारी ने बताया कि ऐसे कई मामलों का पता चला है कि जहां नो योर कस्टमर नियम की अनदेखी कर खाते खोले गए थे।

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