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फिर हुई किन्नर के साथ बदसुलूकी ,पुणे के मॉल में जाने से रोका

Edited by -Priya Bajpai

आज भले सुप्रीम कोर्ट ने किन्नरों को समाज में महिला और पुरुषों के समान दर्जा दिया हो कुछ ट्रांसजेंडर तो पुलिस प्रसाशन , कोई जज की कुर्सी पर बैठा है तो कोई राजनीति गलियारों में अपने हौसलों का परिचय दे रहा है वही हाल ही में एक ऐसे मामला सामने आया है जहा पुणे के शॉपिंग मॉल में ट्रांसजेंडर को जाने की अनुमति नहीं मिली

 

 

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ट्रांसजेंडर (सोनाली दलवी) जब पुणे के फीनिक्स मॉल में शौपिंग के लिए अन्दर जा रही थी तब ही वह के अधिकारियों ने उनसे कहा कि उनकी पॉलिसी ट्रांसजेंडर्स को अंदर आने की अनुमति नहीं देती

 

 

पुणे के मॉल में किन्नर को जाने से रोका, उसने कहा- करूंगी मुकदमा

 

 

 

 

उन्होंने कहा, ‘जब मैंने उनसे अपनी पॉलिसी को समझाने के लिए कहा, तो वे कुछ नहीं बोल पाए। अब मैं उनके खिलाफ केस दर्ज करूंगीये कोई पहेली बार किसी ट्रांसजेंडर के साथ दुर्व्यवहार नहीं हुआ है

 

ऐसे मामले हमारे सामने आते ही रहेते है समाज में उनको एक हीनभावना के साथ देखा जाता है  इस रवैये को झेलने के बावजूद उन्होंने साबित किया कि वे किसी भी सूरत में सामान्य लोगों से कमतर नहीं है इसका जीता-जागता उदाहरण जोयिता मंडल हैं।

 

पहली ट्रांसजेंडर है जज

 

जोयिता देश की लोक अदालत की पहली ट्रांसजेंडर जज हैं। कहते हैं व्यक्ति अपनी मेहनत के दम पर सब कुछ हासिल कर सकता है। ये कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है जोइता मंडल पर। क्या अब भी समाज यही कहेगा कि ट्रांसजेंडर किसी से कमतर हैं? फिर इतना भेदभाव क्यों?

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