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अतिथि देवो भव: ग्रामवासी नर्मदा सेवा यात्रा के स्वागत को आतुर

भोपाल- ‘नमामि देवि नर्मदे’ नर्मदा सेवा यात्रा अमरकंटक में नर्मदा के दक्षिण तट से 11 दिसम्बर 2016 को प्रारंभ होकर 52वें दिन 31 जनवरी को पूर्व निमाड़ खण्डवा जिले के हरसूद विकासखण्ड के धनोरा ग्राम में प्रवेश कर रही है। ‘अतिथि देवो भव:’ की भारतीय परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामवासी नर्मदा सेवा यात्रा के स्वागत को आतुर हैं। उत्साह और उल्लास का आलम यह है कि नर्मदा यात्रा परिक्रमा पथ को कहीं चूने की लाइन से सजाया गया है तो कहीं केसरिया-पीले गेंदे के फूलों से रंगोली बनाई गई है। कहीं श्वेत पत्थरों से सु-स्वागतम् उकेरा गया है तो कहीं दीवारों पर मोक्षदायिनी पुण्य-सलिला मां नर्मदे का चित्रांकन किया गया है। कहीं जवारों से नमामि देवी नर्मदे यात्रा का वंदन लिखा गया है तो कहीं तोरण द्वार फूलपत्तों की वन्दनवार से सजाए गए हैं। घरों के समक्ष रंगों और फूलों से रंगोली का सृजन किया गया है तो कहीं मां नर्मदा के संरक्षण को प्रेरित करते नारों के चित्रांकन के साथ फलदार पौधे लगाये गये हैं। चारो और जहां तक दृष्टि जाती है वहां साफ-सुथरी सड़कें, श्वेत रंग में पुते मकान आदि जैसे स्वच्छता मिशन को साकार करते प्रतीत हो रहे हैं। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जिला कलेक्टर स्वाति मीणा नायक द्वारा विशेष रूचि के साथ तत्परता से नर्मदा सेवा यात्रा मार्ग एवं यात्रा के रात्रि विश्राम वाले गांव आदि में सुरक्षा एवं सुविधा के उद्धेश्य से संचालित काम की प्रगति का जायजा लिया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। साथ ही गाँव का भ्रमण कर लोगों से यात्रा में जुडने का अनुरोध किया जा रहा है। यात्रा की पूर्व तैयारियों और समय सीमा में समुचित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के उद्धेश्य से प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। ग्रामवासियों का सहयोग एवं उत्साह देखते ही बनता है। हरेक गांव में यात्रियों के भोजन और स्वल्पाहार आदि के लिये खुले मन से लोगों ने आकर भूमिका का निर्वहन किया है। ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के सदस्य ललित मालवीय ने कहा कि नर्मदा जल को प्रदूषण से बचाने और संरक्षण का जो अवसर हमें इस यात्रा की सेवा के माध्यम से मिला है, वह सौभाग्य की बात है। जनपद उपाध्यक्ष जय यादव सर्वप्रथम धनोरा और दगडख़ेड़ी में यात्रा के आगमन को लेकर रोमांचित एवं उत्साहित होते हुए कहते हैं कि हम एक माह से बाट जोह रहे हैं। वहीं सरपंच कचरूसिंह मण्डलोई ने बताया कि समस्त ग्रामवासी पलक-पाँवड़े बिछाये नर्मदा सेवा यात्रा की प्रतीक्षा में है। नर्मदा मैया को प्रदूषण से बचाने के लिए फलदार पौधे भी एक किलोमीटर के तटीय क्षेत्र में लगाये जायेंगे। आयोजन समितियों, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर हरेक ग्रामवासी सेवा करने के लिये लालायित है। बुजुर्गों का कहना है कि हम बाल्यावस्था से नर्मदा माई के दर्शन करते आ रहे हैं। पहले तो इसमें अपार जल राशि थी और प्राकृतिक सौंदर्य की छटा निराली थी, लेकिन आज कहीं-कहीं तटीय सुंदरता का लोप हो गया है और प्रदूषण से भरी सिमटी-सी जल धारा को देख मन में पीड़ा और टीस उपजती है। आज हमें खुशी है कि मुख्यमंत्री जी ने इस चुनौतीपूर्ण काम का बीड़ा उठाकर इसे एक जन-आंदोलन का रूप दिया है। हम सभी दृढ़ संकल्पित होकर इस पुनीत यज्ञ में आहुति देने को तत्पर हैं। लोगों को यात्रा से जोड़ने के लिए घर-घर पीले चावल दिये गये हैं तो नर्मदा जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिये पूजन सामग्री, पुष्प, हार आदि जल में विसर्जित नहीं किये जाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों ने यात्रियों के लिये अपने घर के द्वार खोल दिये हैं। उनके ठहरने, भोजन, विश्राम आदि समस्त व्यवस्थाएं अपने स्तर पर जुटाई हैं। लोगों के सेवा भाव के रवैये को देखकर प्रशासन भी उसमें सहभागी बना है। इस प्रकार नर्मदा सरंक्षण के लिए सेवा यात्रा जन-जन का अभियान और आस्था का केन्द्र बन गयी है। मां नर्मदा ने निमाड़ को बहुत सी सौगातें दी हैं। इंदिरा सागर परियोजना से जिले का सिंचित रकबा बढ़ा है तो वहीं हनुवंतिया जैसा अनूठा पर्यटन स्थल भी मिला है, जिसने राष्टीय मानचित्र पर अपनी पहचान कायम की है। वहीं ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग वैश्विक आस्था के केन्द्र है, तो सिंगाजी की समाधि और ताप विद्युत गृह एवं सम्पूर्ण पूर्व निमाड़ को जलापूर्ति भी माँ नर्मदा करती हैं।

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