जनता को मनाने में नाकाम साबित हो रही भाजपा प्रत्याशी रेखा वर्मा

 

सांसद रेखा वर्मा के चुनाव प्रचार की निकल रही हवा

 

उप मुख्यमंत्री की जनसभा में भी नही दिखी भीड़,खाली पड़ी रही दीर्घा,सांसद की क्रियाकलापों से क्षेत्र की जनता में उपजा जनाक्रोश,तीसरे पायदान पर दिख सकती हैं धौरहरा की निवर्तनान सांसद

एस.पी.तिवारी/नित्यानन्द बाजपेई/एडिटेड- पियुष मणि अवस्थी….

लखीमपुर-खीरी। 29 लोकसभा धौरहरा भाजपा प्रत्याशी रेखा अरूण वर्मा चकरघिन्नी बनी हुई है।समझ में नहीं आ रहा कि वह क्या करें जहां पर भी जाती हैं विरोध के स्वर मुखर होने लगते हैं। क्षेत्र में चुनाव प्रचार से भी मीलों दूर दिखाई पड़ रही है। आम जनमानस में उनकी फजीहत हो रही है एक तो वह चुनाव जीतने के बाद केवल चंद सजातीय लोगों की नेता बनकर रह गई।इसके अलावा लोकसभा चुनाव मोदी की सुनामी में जीतने के बाद जनता के बीच मे न पहुँचना उनके आड़े आ रहा है।

 

 

पूरे 5 वर्ष समारोहो व राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शिरकत करके सस्ती अखबारी सुर्खियां बटोरती रही क्षेत्र की जनता से रूबरू होकर उनकी समस्याएं सुनना व उनका निराकरण कराना उचित नहीं समझा गांव लिए गोद के मामले मे गौर करें तो इनके द्वारा गोद लिए गांव धखौरा आज भी खस्ता हाल रास्ता व शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव गांव में कीचड़ युक्त गलिया व चोक पड़ी बजबजाती नालिया इनके विकास की दास्तां स्वयं बया कर रही हैं।सांसद बनने के बाद शायद ही एक बार क्षेत्र का भ्रमण किया हो और असंख्य जनता को तो उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ हो अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान सांसद रेखा वर्मा ने भले ही अपने क्षेत्र का विकास कम किया हो पर स्वयं वह अपने चंद चहेते लोगों का चौमुखी विकास करने में कोई कोर कसर शायद ही छोड़ी हो सांसद द्वारा प्रधानमंत्री के दावों की पोल खोल करके सत्ता की हनक पर जमकर भ्रष्टाचार किये जाने की जनचर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है।

 

 

 

इसकी जीता जागता उदाहरण धौरहरा लोकसभा की तहसील मोहम्मदी के विकास खन्ड पसगवा की ब्लाक प्रमुख सांसद रेखा वर्मा की मां है।लेकिन प्रमुखी का संचालन माननीया के द्वारा होने के बात प्रकाश में आ रही है। विकास खन्ड पसगवा मे आये सरकारी धन की लूट व फर्जीवाड़ा किये जाने तथा क्षेत्र पंचायत सदस्यों को उनके क्षेत्र में विकास कार्य कराने को काम न मिलने के चर्चे अधिकांश बीडीसी लोगों द्वारा इनका जमकर विरोध किया गया था।

 

 

 

ब्लॉक सभागार में मीटिंग के दौरान काफी हो हल्ला भी हुआ था कई सदस्यों ने मीटिंग हाल में ही उनके द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार का पुरजोर उच्च स्वर में विरोध व्यक्त किया था।अभी हाल में ही सांसद जी ने एक और भ्रष्टाचार की मिसाल पेश कर मोदी योगी के भ्रष्टाचार मुक्त दावो की हवा निकालकर कई करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करते हुए पसगवाँ ब्लाक की 100 ग्राम पंचायतो के प्रधानो व पंचायत सचिवों से तीन तरीके से भ्रष्टाचार करके चेके कटवा ली गयी क्योंकि सांसद जी इसी पैसे को चुनाव में खर्च कर दिल्ली का सफर तय करेगी। मजबूर प्रधान व सचिवों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर सभी दबी जुबान से बताया कि मरता नही तो करता क्या की कहावत को चरितार्थ कर अपनी गर्दन पर लटकती सत्ता की तलवार को हटाने का प्रयास करते हुए मजबूरन चेके काटनी पड़ी।

ऐसे किया गया घोटाला👇👇👇

वाल पेटिग कराने के नाम पर पेंटर परमानंद के नाम प्रति ग्राम पंचायत 19,000 हजार की दर से 100 ग्राम पंचायतो से चेके कटवाई गई। उसके बाद दो नल रिवोर कराने के नाम पर प्रति ग्राम पंचायत से 32,000 हजार रुपये के हिसाब से 100 ग्राम पंचायतो से चेके कटवाई गई।

इसी क्रम में 90,000 हजार रुपये प्रति ग्राम पंचायत से सोलर लाइट लगवाने के नाम पर 100 ग्राम पंचायतों से चेके कटवाई गई।

इसके साथ ही 100 ग्राम पंचायतों से ईट क्रय किये जाने के नाम पर एच. एल. एल. पी सिरहा के नाम पर 100 ग्राम पंचायतों से लगभग 1.5 करोड़ रुपये की चेके कटवाये जाने का मामला प्रकाश में आया है।उपरोक्त जिन कामो के नाम चेके काटी गयी वह काम जमीनी हकीकत मे किसी भी ग्राम पंचायत मे नही कराये गये

 

 

सत्ता की हनक की भय से एैसे प्रधान व पंचायत सचिवों सब कुछ जानते हुए मन मसूसे बैठे सत्ता की ताकत को कोस रहे हैं।वह इसलिए अभी हाल में ही विरोध करने वाले क्षेत्र पंचायत सदस्यों का होली मिलन होने मे राड़े लगा दिये थे। सांसद ने सरकारी मशीनरी का प्रयोग कर विरोधी क्षेत्र पंचायत सदस्यों को बेईज्जत कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। इन सब कारनामों के क्षेत्र में प्रधान व बीडीसी सहित जनता भले ही सामने विरोध सत्ता भय वश नही कर रहे है पर इस बार इनको सबक सिखाने को जनता ने मन में ठान ली है। बीडीसी सदस्य नवी शेर ने बताया कि इनके विरोध व कारनामो के चलते गत दिवस पूर्व मितौली में डिप्टी सीएम की जनसभा में लाख प्रयासों के बाद भी भीड़ नही जुटाई जा सकी।

 

 

बताया तो यह भी जा रहा है कि सांसद अपनी सभाओं में जनता तो क्या पार्टी कार्यकर्ताओं को भी ठीक से नहीं जुटा पा रही है उनके साथ व उनकी सभाओ में चन्द कार्यकर्ता ही होने की बात प्रकाश में आ रही है। सपा बसपा गठबंधन व काँग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद से मुकाबला होने की बड़ी-बड़ी डीगे मारने वाली रेखा वर्मा का चुनाव प्रचार दिन प्रतिदिन फीका पड़ते जाने के कयास लोग लगा रहे हैं।

 

 

 

जनता में इनका विरोध बढ़ता ही जा रहा है विकास की गंगा बहाने व जनता के दुख-दर्द में इनका हितेषी होने का ढिढौरा पीटने वाली धौरहरा सांसद को जनता पांच सालों में देख व परख चुकी है।उन्होंने चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में पीछे मुड़कर नही देखा कि जनता किस हाल मे है सूत्रों की मानें तो तमाम जगहों पर बढ़ते विरोध को देखते हुए अंदर की बात बाहर न पहुंचे इसके लिए कुछ लोगों को फील गुड करा दिया जाता है शायद सांसद जी यह भूल गयी कि जनता की लाठी मे सबसे ज्यादा ताकत होती है और जब जनता की लाठी चलती है तो अच्छे अच्छे करोड़पति0 क्लीन बोल्ड होकर मैदान से वापस हो जाते हैं।

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