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रायसेन में मंत्री की बहु द्वारा आत्महत्या पर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज समेत 3 बीजेपी मंत्रियों पर लगे आरोप

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कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता केके केके मिश्रा ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस जानना चाहती है कि जब आत्महत्या करने के बाद 36 घंटों तक मृतका का शव अस्पताल के शव गृह में रखा रहा, तो 48 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रमाणिक दोषियों के विरूद्व एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?
साथ ही कहा कि, क्या सत्ता में होने के कारण आरोपियों को बचाने के लिए ये कहा जा रहा है कि ‘जांच चल रही है, पहले जांच हो जाने दो, सुसाईड नोट में किसी का नाम नहीं है’! यदि ऐसा है तो आम आदमी के लिए अलग कानूनी प्रावधान क्यों? आरोपों से मंत्री पुत्र कैसे बच सकता है और जांच चल रही है जैसे जुमलों का क्या अर्थ निकाला जाये?  कांग्रेस को इस बात पर भी गंभीर आपत्ति है कि जिन्हें पीड़िता के परिवार से मिलकर सांत्वना देना चाहिए थी वह प्रदेशाध्यक्ष आरोपी गरजेश के मंत्री पिता रामपालसिंह के शिवाजी नगर स्थित सरकारी आवास पर दो घंटे तक उन्हें सांत्वना देते रहे? क्या मंत्री-पुत्र की जगह आम व्यक्ति निशाने पर होता तो भी क्या वे यही कहते?

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कांग्रेस यह भी जानना चाहती है कि विधायक हेमंत कटारे प्रकरण में पीड़िता से जेल में निरूद्ध होने के बाद भी लिखाई गई एक शिकायत पत्र के आधार पर यदि एफआईआर दर्ज हो सकती है, तब प्रीति द्वारा की गई आत्महत्या और तमाम प्रमाणों के बावजूद अब तक एफआईआर नहीं लिखा जाना प्रदेश में कानून के राज की स्थापना को लेकर क्या दोहरा चरित्र नहीं है? यहां शिव-राज है..या जंगल-राज? वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के अपराधियों के खिलाफ ‘एक्शन……एक्शन……सिर्फ एक्शन’ वाले बयान पर भी चुटकी ली और तंज कसते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री खुद प्रभावी अपराधियों को बचाते हैं वे किस मुंह से ‘सिर्फ एक्शन’ लिये जाने की बात कह रहे हैं?


वीडियो कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किये जाने की बात को लेकर भी कांग्रेस मुख्यमंत्री से यह जानना चाहती है कि अधिकारियों को हटा देना उनका विशेषाधिकार है, किंतु उक्त अपराध में शामिल अपने सहयोगी मंत्री रामपालसिंह को मंत्री पद से न हटाने के पीछे उनकी कौन सी नैतिकता, मजबूरी और परेशानी नजर आ रही है?

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