कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मर जाता

 

Adited By

Jitendra Singh

 

 

 

कभी आत्महत्या का विचार आये तो एक बार चक्कर पागलखाने के आईसीयू में लगा देना हॉस्पिटल के अंदर की एक मरीज को बचाने के लिए उसके परिजन कितना मेहनत करते हैं एक डाक्टर कितना मेहनत करता है। लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं जान बचाने के लिए।
इसलिए “दोस्त जिंदगी से बड़ी कोई चीज नहीं है।”
मगर आप समझते हो कि आत्महत्या करने से मेरे दुश्मनों को पछतावा होगा मेरी गर्लफ्रेंड पछतावा करेंगी कोई पछतावा नहीं करता सिवा आपके मां बाप के…

 

 

आपको इतनी सफलता हासिल करनी है मेहनत करके आपकी गर्लफ्रेंड कहे की मैं ऐसा हीरा खो दिया जो वाकई में काबिल था उसे जिन्दगी भर मलाल रहेगा। इसलिए ऐसे प्रण भूलकर भी नहीं लेना चाहिए। दरअसल आज हम क्या कर रहे हैं हमारे एजुकेशन के अंदर क्या हो रहा है??

 

 

“ये कोचिंग सेंटर वाले पर्सेंटेज बढाने के लिए, टॉप करवाने के लिए बच्चों को पढा रहे हैं जीवन जीने का सलीका नहीं सिखा रहे हैं।”
मां बाप भी इस तरह महत्वाकांक्षी हो रहा है कि मेरा बच्चा टॉप करे कभी उससे पूछा आपने क्या खाता है तू कैसा खाता है??
अपनी इच्छा ही थोप रहे हैं। बच्चों को समझाइये और बच्चों को भी एक बात याद रखनी चाहिए अगर आप के अंदर बातचीत में खालीपन है आप मां बाप से नहीं कह पाते हो तो आप गलत हो किसी से नही अपनी दिक्क़ते अपने मां बाप से कहिये आप तो बस सोच लेते हो बस कोई विकल्प नहीं बचा जिन्दगी के अंदर आत्महत्या कर लेते हैं।

 

 

मां बाप से मैं कह नहीं सकता मुझे शर्म आती है। और कहते हो इतना कर्ज हो गया है जमीन गिरवी हो गई है, सम्पति बिक गई है अरे बिकने दे यार क्यों परवाह करता है तू जब तक तेरी जान है तबतक तेरी सम्पति है तबतक तेरे पास पैसा है। नहीं तो कोई वैल्यू नहीं है कोई वैल्यू नहीं है। आपके मां बाप कहते हैं कहने दो थोडे वेशर्म बनिए थोडे ठिठ बनिए अगर जिन्दगी के अन्दर कुछ बडा करना है तो, महत्वाकांक्ष कभी पूरी नहीं होती जाहे आपके मां बाप हो चाहे किसी के हो दसवीं के बाद बारहवीं में ये कर लेगें फिर आईआईटी फिर नीट फिर आईएएस फिर आईपीएस अफसर बन जा महत्वाकांक्षा कभी पूरी नहीं होती।

 

 

 

 

एक बात याद रखना राहुल द्रविड़ एसएसबी का इंटरव्यू देने जाते हैं फेल हो जाते हैं सीडीएस के अंदर उसके बाद आज क्रिकेट में उन्होंने एक क्रिकेट की दीवार कहा जाता है। उन्होंने कभी ये नहीं सोचा कि अगर मैं जिन्दगी में फेल हो जाउंगा तो मैं कुछ नहीं कर पाउंगा। कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मर जाया करते हैं। और राहत इन्दौरी साहब कहते हैं काम गैर जरूरी है जो सब करते जो कुछ नहीं करते हैं वे गजब करते हैं। और एक बात याद रखना कभी मैने लिखा था “टूटा हूँ खत्म नहीं हुआ फिर से जुड़ जाउंगा पंख नहीं तो क्या हुआ हौसले से ऊड़ जाउंगा” इसलिए जिन्दगी जीने का सलीका सीखिए थोड़ी मेहनत करना सीखिए क्या पता भविष्य में क्या लिखा है किसके बारे में क्या लिखा है ऐसे डिसिजन नहीं लेने जिंदगी के अंदर कभी हताश नहीं होना जिन्दगी में जब भी हताश होना आशा हो निराशा हो एकांत में चले जाईये दोस्तो के साथ शेयर कीजिए कभी भी उनको मन में मत रखिए कभी चिन्तन का समय दीजिए और हमेशा आप ज्यादा

 

 

 

 

 

महत्वाकांक्षी भी ना बने ठीक है। आपके अंदर जितनी टैलेंट है उसका उपयोग किजिए और जिन्दगी यही पर खत्म नहीं हो जाती की कोई विकल्प नहीं बचा है। कितनी शर्मनाक बात है वो तो आईपीएस बन गया मेरा दोस्त मैं नहीं बन पाया उसका सेलेक्शन हो गया मेरा नहीं हो पाया मैं क्या करूंगा हो गया तो हो गया शायद ऊपर वाले ने किसी और को किसी और काम के लिए आप लोगों को चुना है। अगर आप इस क्षेत्र में नहीं जाना चाहते तो ऊपर वाले ने किसी बेहतर कार्य के लिए आपको यहां भेजा है हो सकता है कोई बेहतर कार्य आपसे लेना हो वो इतिहास बना सकता है। और दोस्तो “खुदकुशी करने वाले को यहीं हासिल होता है कातिलों की फेहरिस्त में वह शामिल होता है।” जिन्दगी जी कर सीखों अगर कुछ नहीं कर पाए तो समाज के लिए जिंदगी को दान कर देना।

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