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डेंगू के साथ जीका वायरस भी फैलाता है एडीज मच्छर

धारीदार एडीज मच्छर जो एक मनुष्य से दूसरे में डेंगू के वायरस को फैलाता है वह साफ पानी में अंडे देना पसंद करता है। डेंगू के अलावा यह मच्छर चिकनगुनिया, पीतज्वर और कई अन्य बुखारों के वायरस भी फैलाता है। हाल ही में पता चला है कि जीका वायरस भी इसी मच्छर के जरिए मनुष्यों में फैलता है।
एडीज मच्छर सबसे ज्यादा सूर्योदय और सूर्यास्त के समय डंक मारता है। लेकिन दिन में भी यह खून चूसना जारी रखता है। फीमेल एडीज मच्छर कूलर की टंकियों में, पौधों के गमलों में, पुराने बेकार बर्तनों और टायरों में जमा पानी में अंडे देती हैं। यूनानी भाषा से लिए गए शब्द एडीज का मतलब सुख न देने वाला या दु:खद होता है। इस मामले में यह मच्छर बिलकुल अपने नाम के अनुरूप है।
एडीज मच्छर को पनपने से रोकने के लिए सबसे अच्छा उपाय है- किसी भी हालत में घर में या घर के बाहर पानी को जमा न होने दें। फुल बाजू के कपड़े पहनें और मच्छररोधी क्रीमों का प्रयोग भी व्यक्तिगत स्तर पर किया जाना चाहिए। इन मच्छरों से रोकथाम के लिए मच्छरदानी खास कारगर नहीं है क्योंकि हम रात में सोते वक्त मच्छरदानियों का प्रयोग करते हैं लेकिन यह मच्छर दिन में काटते हैं।
डेंगू में गंभीर लक्षणों का प्रभाव बहुत कम रोगियों में देखा जाता है, लेकिन जागरूकता सभी में जरूरी है। गंभीरता दो कारणों से पैदा होती है। पहला प्लाज्मा का खून की नसों से रिसकर टीशू में निकल जाना और दूसरा प्लेटलेट्स की कमी व ढंग से काम न करने के कारण खून बहना बंद न होना। कई बार देखा जाता है कि मरीज और उनके संबंधी प्लेटलेट्स की थोड़ी कमी होने की स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाने की डॉक्टरों से फरमाइश करने लगते हैं। यह सही नहीं है। कब किस रोगी को प्लेटलेट्स ट्रांस्फ्यूज किए जाएंगे, यह तय करना डॉक्टर के हाथ में है और वही यह बेहतर बता सकते हैं।
डेंगू बुखार में हर वह लक्षण बहुत ध्यान देने योग्य है, जो कहीं भी रक्तस्राव का इशारा कर सकता है। मसूड़ों या मलद्वार से बहता खून, बार-बार होती उल्टियां, तेज चलती सांस व नब्ज, पेट में दर्द और घबराहट व बेचैनी। इन सभी को गंभीरता से लेना चाहिए। बुखार न होना कई बार गंभीरता न होने का लक्षण नहीं होता। डेंगू के इलाज के लिए कोई ऐंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। रोगियों को खास ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि शरीर में पानी की कमी किसी हालत में न हो। ऐसे में समुचित मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए।
साथ ही बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें। यह नुकसानदायक हो सकता है। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लेकिन प्लेटलेट्स चढ़ाने भर से डेंगू रोगी ठीक नहीं हो जाते। इसलिए प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन के अलावा उन बातों को पहले अमल में लाना चाहिए, जो सरलता से की जा सकती हैं। बाकी फैसला डॉक्टर पर छोड़ देना चाहिए।

 

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