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लखनऊ

लखनऊ विश्विद्यालय में सुनील बंसल ने देश की भक्ति का अर्थ समझाते हुए राष्ट्र के पुन: निर्माण की बात कही

लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल ने आज लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्र निर्माण एवं राष्ट्रीय एकीकरण में युवाओं की भूमिका विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत देश  की भक्ति का मतलब बताया और राष्ट्र की पुन: निर्माण करने की सलाह देते हुए कहा कि नारा गले से नहीं दिल से लगाना चाहिए नारा जब हृदय से निकलेगा तब अंतर्मन की गूंज बनेगी और तब भारत माता की सही मायने में जय होगी।
“बंसल एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन साइंस एंड डेवलपमेंट” के 22 वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बंसल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वाधीनता के बाद से ही राष्ट्र निर्माण हुआ, राष्ट्र पुन: र्निर्माण को लेकर देश में बहस शुरु हो गई उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं के बलिदान के बाद भारत स्वाधीन हुआ, अंग्रेजों ने यह भी अवधारणा स्थापित करने की कोशिश की कि भारत कई राज्यों को मिलाकर भारत राष्ट्र बना परंतु हमारी संस्कृति और परंपराओं की मूल अवधारणा हमारे यहां घी दूध की नदियां बहा करती थी उसी को साकार करना राष्ट्र निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपुर्नर्निमाण के लिए आवश्यक है राष्ट्रबोध का बोध बढे़ एक जन, एक राष्ट्र एक संस्कृति का बोध बढ़े, यह पहली शर्त है। व्यक्ति के निर्माण से राष्ट्रनिर्माण।
 सुनील बंसल ने कहा कि दुनिया में हम भारत के ब्रांड अंबेसडर बने दुनिया के किसी भी देश में हम चाहे इंजीनियर डॉक्टर एवं वैज्ञानिक बनकर जाएं वहां हम भारतीय कला संस्कृति एवं अपनी योग्यता से भारत के ब्रांड एंबेसडर बने। बंसल ने कहा कि आज वैश्वीकरण के इस दौर में जब पूरी दुनिया एक मोबाइल में सिमट गई है देश के युवाओं को इस बात पर विचार करना होगा कि मैं एक अच्छा मनुष्य कैसे बनू देश का अच्छा नागरिक कैसे बने इसके लिए देश की आवश्यकता के आधार पर अपना कैरियर बनाने की आवश्यकता है हम जैसे होंगे वैसा ही भविष्य अपने देश भारत का होगा।
बंसल ने कहा कि आज फिर से देश में सामाजिक पुनर्रचना की आवश्यकता महसूस हो रही है प्राचीन समय में समाज की व्यवस्था जाति के आधार पर नहीं बल्कि कर्म के आधार पर बनाई गई थी परंतु आज जन्म के आधार से जुड़ गई है। पूरी दुनिया में भारतीय युवा प्रतिभाओं ने अपनी मजबूत उपस्थित दर्ज कर रखी है।  उन्होंने कहा कि राष्ट्र को पुर्नर्निमाण वर्तमान की आवश्यकता है।

बंसल ने वर्तमान की समस्याओं के समाधान लिए 05 आयामों पर कार्य करने का जोर दिया–

(1)व्यवस्था का भारतीयकरण
(2)व्यक्ति निर्माण
(3) राष्ट्रीयता का बोध
(4)परिवर्तन स्वयं से घर से
(5)  आयाम हम सबको ”माई कन्ट्री माई कैरियर” स्वामी विवेकानन्द के स्लोगन को आत्मसात करना होगा।

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