पूर्व विधायक राज किशोर सिंह

मैं अपने घर बसपा में पुन: लौटा- राज किशोर सिंह

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में राज किशोर सिंह एक चर्चित नाम बन चुके हैं। बस्‍ती जिले के चंद्ररेवा गांव में 1 फरवरी, 1979 में जन्‍मे राज किशोर सिंह की प्रारंभिक पढ़ाई ए.पी.एन डिग्री कॉलेज में हुई। जहां उन्‍होंने स्‍नातक की डिग्री ली और वहीं पर अपनी छात्र राजनीति की शुरुआत की। पहली बार छात्र राजनीति की शुरुआत ए.पी.एन डिग्री कॉलेज के उपाध्‍यक्ष पद से की। फिर सन् 2000 में जिला पंचायत सदस्‍य बने। सन् 2002 आते-आते बहुजन समाज पार्टी में बस्‍ती जिले के हर्रैया विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए।

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साल 2003 में बसपा सरकार गिरने के बाद 2004 में राज किशोर सिंह ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और मुलायम सरकार ने उन्‍हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया। दिनों-दिन राज किशोर सिंह का कद बढ़ता ही जा रहा था। फिर साल 2007 में अखिलेश सरकार में फिर से कैबिनेट मंत्री बनाए गए और विभाग मिला पशुपालन व लघु सिंचाई। नेताजी और शिवपाल यादव के बहुत ही करीबी कहे जाने वाले राज किशोर सिंह का कद कम करने की बात होने लगी, जो उन्‍हें नागवार गुजरी।

कांग्रेस छोड़ बसपा में की वापसी

अखिलेश यादव और मायावती के महागठबंधन के कारण इनको कोई स्‍थान नहीं मिल पाया। लिहाजा इन्‍होंने पार्टी को छोड़ना ही उचित समझा और साल 2019 में कांग्रेस का दामन थाम लिया और बस्‍ती जिले से सांसदी का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में इन्‍हें हार का सामना करना पड़ा, क्‍योंकि वर्तमान में बीजेपी की लहर चल रही थी, जिस कारण से राज किशोर सिंह के किए कार्यों को जनता ने समझा तो जरूर लेकिन अपना मत भारतीय जनता पार्टी को दिया। लेकिन, कहा जाता है ना काम करने वाले को पार्टी की कोई आश्‍वयकता नहीं होती। कांग्रेस में रहते उनकी बातों और सुझावों को कोई तवज्‍जो नहीं दी जा रही थी, इसी कारण अब उन्‍होंने पुन: अपने घर यानी बहुजन समाज पार्टी में वापसी की।

छोटे बेटे को बनाया सबसे कम उम्र का जिला पंचायत अध्‍यक्ष  

राज किशोर सिंह अपने छोटे भाई डिंपल को भी सांसदी का चुनाव लड़ा चुके हैं, लेकिन उनको भी हार का ही सामना करना पड़ा। वह अपने छोटे से परिवार में बड़े खुश थे, लेकिन 2012 में एक ऐसी घटना घटी, जिसने इनकी कमर ही तोड़ दी। ये घटना थी- इनके बड़े बेटे शिवम सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत। इसके बाद उन्‍होंने अपने को संभालते हुए अपने छोटे बेटे देवेंद्र सिंह उर्फ शानू को जिला पंचायत का सबसे कम उम्र का प्रत्‍याशी बनाकर भारी मतों से जिताकर अध्‍यक्ष बनाया और विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

अब वो फिर से एक बार अपने पुराने घर यानी बसपा में वापस लौटे हैं। अपने पूरे परिवार के साथ लौटे हैं। हमारे स्‍थानीय संपादक नकुल वर्मा से विशेष बातचीत करते हुए राज किशोर सिंह ने अपनी इन बातों को साझा किया और कहा कि बहनजी के मिशन में एक सच्‍चे सिपाही की भूमिका अदा करूंगा।  

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