अगर खांसी का नहीं किया उपचार, तो हो जाएंगे इस गंभीर बीमारी के शिकार

हम सभी हमेशा खांसी को नज़रअंदाज कर देते है। अक्सर यही सोचते है की ख़ासी है तो कफ सिरप पी लेते है चली जाएगी। हम खांसी को आम बीमारी समझ डॉक्टर को दिखाना जरूरी नहीं समझते लेकिन क्या हमने कभी ये सोचा है की अगर यही खासी ज़्यादा दिन तक बनी रहे तो कितनी बड़ी बीमारी का कारण बन जाती है।

डॉक्टर्स का कहना है कि अगर लोगों को दो महीने से लगातार बलगम वाली खांसी आ रही है, तो वे समझ लें कि आपको डॉक्टर से तुरंत मिलने की जरूरत है। अभी हम सभी लोग क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के बारे में नहीं पता लेकिन इस बीमारी को हम आसानी से पहचान सकते हैं।

सीओपीडी को हम ‘कालादमा’ भी कहते है। इस बीमारी में इतनी ख़ासी आती है कि फेफड़ा बढ़ जाता और रोगी चलने लायक नहीं रहता। यहा तक कि मुंह से सांस छोड़ना उसकी मजबूरी बन जाती है। इस रोग का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। गांव में जहां लकड़ी पर खाना बनता है उन स्थानों की अधिकतर महिलाएं सीओपीडी की चपेट में रहती हैं।

सीओपीडी के लक्षण 35 साल की उम्र के बाद ही नजर आते हैं। सीओपीडी का ज्यादातर उपचार ऐसा है, जो व्यक्ति खुद भी कर सकता है। हाालांकि सीओपीडी की दवाइयां लम्बे समय तक चल सकती है।

अगर कोई भी इंसान इस बीमारी के चपेट में हैं, तो बिना डॉक्टर के सलाह के दवा नहीं बंद करनी चाहिए। इसके अलावा लोगों में नॉन इन्वेसिव वेंटीलेशन (एनआईवी) उपचार के बारे में जागरूकता का अभाव है।

सीओपीडी की मध्यम या गम्भीर अवस्था वाले मरीजों को एनआईवी दवाई दी जा सकती है। यह रक्त में कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर कम कर देती है और इससे मरीज सामान्य ढंग से सांस ले पाता है।

सीओपीडी या सांस की समस्या की जोखिम वाले मरीजों को घर के अंदर ही रहना चाहिए।

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