दिव्यांग नीतू

छोटे गांव की दिव्यांग नीतू बनीं महिलाओं के लिए मिसाल, इस काम से संवार रहीं बहनों का भविष्य

छोटे गांव की दिव्यांग नीतू बनीं महिलाओं के लिए मिसाल, इस काम से संवार रहीं बहनों का भविष्य

आज के दौर में महिलाएं, पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहीं हैं और उनसे किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं। यहां तक कि लोगों के कथन अनुसार जो मेहनत भरा कम सिर्फ पुरुष करते थे, महिलाएं उसमें भी उन्हें मात दे रहीं हैं। ऐसे ही काम के लिए उत्तर प्रदेश की एक दिव्यांग महिला नीतू देश की महिलाओं के लिए मिसाल बन गईं हैं। नीतू सैमर टोला गाँव में एक हाथ से वेल्डिंग का काम करती हैं और अपने परिवार का पालन पोषण करती है।

दिव्यांग नीतू

उत्तर प्रदेश के चन्दौसी क्षेत्र के सैमर गाँव की नीतू वेल्डर पिता की बीमारी के चलते घर- परिवार के खर्च का बोझ उठा रही है। दिव्यांग होने के बावजूद नीतू वेल्डिंग का काम बखूबी करती हैं। इस काम को करके नीतू परिवार का पालन-पोषण करने के साथ-साथ अपनी तीन बहनों का भविष्य भी संवार रहीं हैं। नीतू एक ही हाथ से ऐसा काम करके महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गईं हैं।

अपने घर के बाहर खराद की दुकान चलाकर चार बेटियों व पत्नी का पालन पोषण करने वाले कल्यानदास घर की दीवार गिरने से घायल हो गए थे। लाचारी के मारे माता-पिता आपस में बात करते वक्त कह रहे थे कि काश एक बेटा होता तो कम से कम दुकान तो चला लेता। बस यही बात नीतू को गहरी चुभ गई, और उसने बंद पड़ी दुकान को खोला और काम शुरू कर दिया।

कड़ी मेहनत और लगन से नीतू ने अपने हुनर को तराशा और बीतते समय के साथ-साथ उसने नीतू वेल्डर के नाम से अपनी पहचान बना ली। जब पहचान बनी तब आमदनी बढ़ी, फिर इसी के सहारे नीतू घर के साथ-साथ अपनी बहनों की शिक्षा पर ध्यान दिया दिया। भारी भरकम काम करने से नीतू के शरीर के एक हिस्से ने काम करना बंद कर दिया और वह दिव्यांग हो गई। फिर भी नीतू ने हार नहीं मानी और अपने काम पर डटी रही।

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