रेल प्रोजेक्ट को लेकर ईरान ने की चीन से डील, भारत को दिया जोरदार झटका

अब ईरान ने चीन से रेल प्रोजेक्ट को लेकर डील की है। जिस प्रोजेक्ट को भारत करना चाहता था वह प्रोजेक्ट अब चीन करेगा। सूत्रों के अनुसार- अमेरिका के प्रतिबंध और दबाव के चलते भारत इस प्रोजेक्ट की फंडिंग में देरी कर रहा था।

ईरान ने रजनीतिक रूप से अहम चाबहार जाहेदान रेल प्रोजेक्ट से भारत को किनारे कर दिया है. ईरान ने अकेले ही इस रेल प्रोजेक्ट को पूरा करने का फैसला किया है. ईरान के इस फैसले को भारत के लिए झटका माना जा रहा है. बल्कि ईरान ने यह भी साफ किया है कि इस प्रोजेक्ट में भारत के लिए दरवाजे बंद नहीं हैं. अगर भारत इस प्रोजेक्ट में शामिल होना चाहता है, तो हो सकता है.

चाबहार जाहेदान रेल प्रोजेक्ट से भारत को किनारे किए जाने का मामला उस समय सामने आया है, जब ईरान और चीन 25 साल के लिए 400 अरब डॉलर के आर्थिक और सुरक्षा सामरिक भागीदारी डील को अंतिम रूप देने जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक भारत द्वारा इस प्रोजेक्ट की फंडिंग में देरी किए जाने की वजह से ईरान ने यह फैसला लिया है.

ईरान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट इशाघ जहांगिरी ने कहा कि चाबहार जाहेदान रेल प्रोजेक्ट के लिए ईरान सरकार ने नेशनल डेवलपमेंट फंड से 30 करोड़ डॉलर देने का फैसला लिया है. इससे पहले इस रेल प्रोजेक्ट को ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक रेलवे (RAI) और इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (IRCON) को पूरा करना था.

ईरान ने कहा भारत के लिए हमेशा दरवाजे खुले रहेंगे-

सूत्रों के मुताबिक ईरान सरकार का यह भी कहना है कि इस प्रोजेक्ट में इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के शामिल होने के लिए रास्ते हमेशा खुले हैं. अमेरिका के प्रतिबंध और दबाव के चलते भारत के रुचि नहीं लेने को ओर संकेत करते हुए ईरानी प्रशासन ने कहा कि भारत के साथ ईरान के रिश्तों की कोई सीमा नहीं हैं. एक दोस्त के रूप में भारत का हमेशा स्वागत किया गया है और आगे भी किया जाएगा. किसी तीसरे पक्ष को भारत और ईरान के सौहार्दपूर्ण ऐतिहासिक रिश्तों को बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

रेलवे लाइन का निर्माण करता चाहता है भारत-

मकरान डेवलपमेंट काउंसिल के पहले सत्र में इशाघ जहांगिरी ने कहा कि ईरान सरकार ओमान सागर में मकरान के दक्षिणी तटीय इलाकों के विकास को तवज्जो देती है. भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत रेलवे लाइन का निर्माण हो, यह भारत भी चाहता है. इसका मकसद अफगानिस्तान और मध्य एशिया में व्यापार के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बनाना है.

फंड देने में भारत कर रहा देरी-

सूत्रों का कहना है कि चाबहार बंदरगाह के अलावा इस रेलवे प्रोजेक्ट में भी भारत की अहम भागीदारी की उम्मीद की जा रही थी. हालांकि भारत की अरुचि के चलते ईरान सरकार ने अकेले ही इसको पूरा करने का फैसला लिया है. सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से भारत इसके लिए फंडिंग देने में देरी कर रहा था.

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