आज के ही दिन हुआ था महाराष्ट्र के गौरव बाला साहेब ठाकरे का निधन |

बेबाकी के साथ अपना जीवन जीने वाले बाल ठाकरे ने 17 नवंबर 2012 को आखिरी सांस ली थी। बाला साहब ठाकरे की इज्ज़त न सिर्फ महाराष्ट्र  में बल्की पूरे हिन्दुस्तान में होती थी | बाला साहब ठाकरे से ही उनके परिवार में राजनीती का सिल सिला चला आ रहा है | मीनाताई ठाकरे से शादी के बाद उन्हें तीन बेटे भी हुए- बिंदुमाधव ठाकरे, जयदेव ठाकरे और उद्धव ठाकरे। इस वक़्त उनके बेटे उद्दव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं |

1960 में वह पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए। अपने भाई के साथ मार्मिक नाम से साप्ताहिक अखबार निकाला। 1966 में ‘मराठी माणुस’ को हक दिलाने के लिए शिवसेना बनाई। खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा और किंग मेकर की भूमिका ही निभाई। बेबाकी तो जैसे उनमें कूट-कूटकर भरी थी। जब अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराया गया और कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा था, तब बाल ठाकरे ही थे जो खुलकर कह गए कि शिवसैनिकों ने गिराई है मस्जिद। इमरजेंसी के दौरान विपक्ष में रहते हुए भी इंदिरा गांधी को समर्थन दिया था।

फिर, प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति बनाने की बात हो या प्रणब मुखर्जी को, उन्होंने गठबंधन से बाहर जाकर अपनी बेबाकी दिखाई। 1995 में शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाई। 2006 में जब बेटे उद्धव को शिवसेना की कमान सौंपी तो राज ठाकरे ने अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई। यह बात आखिरी वक्त तक उन्हें टीसती रही।

राजनीती में आने से पहले बाला साहेब कार्टूनिस्ट थे | उनके परिवार में राजनीती भले ही उनके परिवार से शुरु हुई हो लेकिन वो न कभी सरकार का हिस्सा रहे न कभी उन्होंने चुनाव लड़ा| लेकिन आज उनके बेटे उद्धव आज महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री हैं।

बाला साहेब के निधन के वक्त पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर उमड़ पडी थी |

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