सिर्फ दोस्त या सच्चे दोस्त ……

आज कल हर कोई अपने काम में इतना  व्यस्त है | कि किसी के पास टाइम नहीं है, अपनों के पास बैठने का , उनका हालचाल पूछने का ,  अपनों की परवाह करना आदि|

एक तरह से हमारे पास कोई ऐसा  है ही नहीं कि जो हमे समझा सके या हमे बताए कि क्या करना चाहिए क्या नहीं | पर एक अच्छा दोस्त हमेशा आपका साथ देता है |

आइये आपको एक ऐसे ही दोस्त कि कहानी बताते है |

मुझे बहुत तेज बुखार था। मैंने घर में नहीं बताया क्यूंकि मैं उन्हे टेंशन नहीं देना चाहती थी |  बुखार की वजह से मेरा शरीर काफ़ी कमज़ोर हो गया था | इसलिए मैंने सोचा की थोडा आराम कर लेती हूँ | डॉक्टर के पास जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी |

कुछ देर बाद मेरी एक रूममेट कमरे मे आयी। उसने मुझे देखा मुझे बहूत तेज़ बुखार है। उसने मुझे आराम करने के लिए कहा और वो अपने कॉलेज चली गयी।

कुछ देर बाद मेरी दुसरी रूममेट कमरे में आई। मुझे  देखते ही वह  समझ गयी की मुझे बुखार है। उसने मेरे माथे पर हाथ रखा और कहा “मेघा … तुझे तो बहूत तेज बुखार है”।

मैंने कहा “ हाँ, थोडा बुखार है आराम करूंगी तो सही हो जाएगा | उसने मुझे डॉक्टर के पास ले जाने  के लिऐ कहा लेकिन मैंने मना कर दिया।

फिर वो दुसरी रूममेट ख़ुद केमिस्ट की दुकान गयी और कुछ दवाइयाँ लेकर आयी और खुद अपने हाथ से मुझे  ख़ाना खिलाने लगी उसके बाद दवा भी खिलाई|

उसने मेरी मदद ऐसे की जैसे माँ या कोई अच्छा फ्रेंड करता है |

 

दोस्तो सच्चा दोस्त वह नहीं है जो ,

आपके रोने में आपका साथ दे बल्कि ,

सच्चा दोस्त वो है जो आपको ,

कभी भी रोने ही ना दे ……….

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