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जानिए गिरीश शर्मा एक टांग गंवाने के बावजूद भी बने बैडमिंटन चैंपियन, देश का नाम किया रौशन

गिरीश शर्मा ने देश के लिए विभिन्न बैडमिंटन चैंपियनशिप और एशिया कप में गोल्ड जीत. बचपन में एक ट्रेन हादसे में अपना एक पैर गंवाने वाले गिरिश आज बैडमिंटन कोर्ट पर देश का नाम रौशन कर रहे हैं. जी हां 16 साल की उम्र में गिरिश ने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था. पहली दफा रैकेट के हाथ में आते ही उन्होंने इस खेल में महारथ हासिल करने की ठानी लिया था.

 

 

गिरीश शर्मा को पहली सफलता अपनी कुछ  महीनों की कड़ी मेहनत के बाद मिली थी. जब उन्होंने दिव्यांग खिलाड़ी के लिए आयोजित होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए पहली बार में ही दो गोल्ड मेडल जीत लिया. इस उपलब्धि ने उन्हें भविष्य में अन्य बड़े टूर्नामेंट में मेडल जीतने की उम्मीद दी.

 

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गिरीश शर्मा इस उम्मीद के साथ ही दिन रात की मेहनत के साथ अपने खेल को हर दिन और बेहतर करना शुरू किया. गिरीश को अपने बेहतर खेल की वजह से ही इजराइल और थाईलैंड में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. उन्होंने इस मौके को भुनाते हुए इजराइल में सिंगल और डबल मैच में दो सिल्वर मेडल भी जीते.

 

 

गिरीश अपनी मेहनत से पारालंपिक्स एशिया कप में गोल्ड मेडल भी जीता. आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद भी गिरिश ने कभी मेहनत करने और अपने खेल को बेहतर करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी. इसी का नतीजा है कि आज भी उनके साथ खेलने वाले लोग उनकी प्रतिभा से खासे प्रभावित होते हैं.

 

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