लाल किले से प्रधानमंत्री का बहुआयामी संबोधन

कृष्णमोहन झा

राष्ट्र के 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए लगभग डेढ़ घंटे के अपने भाषण में जहां एक ओर अपनी सरकार की विगत एक वर्ष की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख किया तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि सरकार ने जो काम हाथ में लिए हैं, उन्हें सुखद परिणिति के बिंदु तक ले जाने के लिए वह कृतसंकल्प हैं। मैंने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखे गए अपने एक लेख में उन मुद्दों की चर्चा की थी जिन पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देशवासियों के नाम अपने संबोधन में अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। कोरोना की विश्वव्यापी विपदा जिस तरह देश के अंदर अपने पांव पसार चुकी है, उसे देखते हुए देशवासियों के मन में यह उत्सुकता स्वाभाविक थी कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में देश में कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार के नए कदमों की जानकारी देंगे और वैक्सीन तैयार करने की दिशा में अब हुई प्रगति से देश को अवगत कराएंगे।

प्रधानमंत्री द्वारा लालकिले की प्राचीर से संकट की चर्चा करते हुए इस जानकारी से  देशवासियों को निश्चित रूप से सुकून महसूस हुआ होगा कि देश के वैज्ञानिक इस समय कोरोना की एक नहीं बल्कि तीन वैक्सीन तैयार करने की दिशा में जी जान  से जुटे हुए हैं और उनका परीक्षण अलग-अलग चरणों में पहुंच चुका है। वैक्सीन तैयार करने में पूर्ण सफलता मिलते ही उसके बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण का खाका भी तैयार है। इस स्वतंत्रता दिवस पर जनता प्रधानमंत्री के मुख से यही सुनने के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। प्रधानमंत्री ने जनता से यह जानकारी साझा करते हुए उन वैज्ञानिकों की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की जो कोरोना वैक्सीन तैयार करने के लिए रात दिन एक कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों को एकनिष्ठ तपस्या निरूपित किया।

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प्रधानमंत्री ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करने के लिए सरकार के कदमों की चर्चा करते हुए नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन प्रारंभ करने के सरकार के फैसले की घोषणा की। प्रधामंत्री ने इसकी खूबियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत होगी। यह अभिनव योजना लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित कराने में मील का पत्थर साबित होगी। इस मिशन के अंतर्गत हर नागरिक को एक हेल्थ आइडी प्रदान की जाएगी, जो लोगों को अस्पतालों में होने वाली बहुत सी मुश्किलों से निजात दिलाने में सहयक सिद्ध होगी। मोदी सरकार की इस अनूठी योजना का देश भर में व्यापक तौर पर स्वागत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस योजना की घोषणा के माध्यम से दरअसल यह साबित कर दिया है कि ‘जान है तो जहान है’ कहावत को वे सरकार का आदर्श मंत्र मानते हैं।

लाल किले की प्राचीर से अपने 7वें स्वतंत्रता दिवस संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हमें कोरोना से खुद के बचाव हेतु पूरी सावधानी बरतते हुए इस आपदा को अवसर में बदलने की इच्छा शक्ति अपने अंदर जगानी होगी। आत्म निर्भरता को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त उदगार संभवत: उनके इस मंतव्य की ओर संकेत कर रहे थे कि हम आत्मनिर्भर भारत अभियान के माध्यम से सारे विश्व को यह संदेश दे सकते हैं कि आत्म निर्भरता की राह पर चलकर भी अपने देश को समृद्ध और खुशहाल बनाने की सामर्थ्‍य हमारे अंदर मौजूद है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जिस तरह आत्मनिर्भर शब्द का बारंबार प्रयोग किया, उससे उनके इस आशय को समझना कठिन नहीं है कि उनकी सरकार इस अभियान को सफल बनाने के लिए कृत संकल्प है और वे देशवासियों से भी आत्मनिर्भरता को जीवन के मूलमंत्र के रूप में आत्म सात करने की अपेक्षा रखते हैं।

गौरतलब है कि विगत दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्म निर्भरता हासिल करने की सरकार की पहल से देश को अवगत कराया था। प्रधानमंत्री ने आत्म निर्भरता का महत्व प्रतिपादित करने के लिए एक संस्कृत श्लोक उद्धृत किया, जिसका भावार्थ यह है कि स्वतंत्रता का मूल स्रोत सामर्थ्य है और समृद्धि का मूल स्रोत श्रम है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस श्लोक को उद्धयत करके दरअसल यही संदेश दिया है कि सक्षम और समर्थ राष्ट्र का निर्माण  करने के लिए हमें आत्मनिर्भर बनना होगा और हमारी अपार श्रमशक्ति की समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के पुनीत पर्व पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम जो संदेश दिया, उसकी एक प्रमुख विशेषता यह थी कि वह  बहुआयामी था। उसमें उन्‍होंने महिलाओं से जुड़े उन विषयों पर भी गंभीरता से चर्चा की जो आमतौर पर चर्चा नहीं की जाती। प्रधानमंत्री ने समाज में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए जानकारी दी कि लड़कियों की विवाह की वर्तमान आयुसीमा को बढ़ाने पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। प्रधानमंत्री ने अपने इस भाषण में हाल में ही घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति में शिक्षा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस शिक्षा नीति को इस तरह तैयार किया गया है कि इसके माध्यम से छात्रों को दी जाने वाली शिक्षा उन्हें भविष्य की चुनैतियों का सामना करने में सक्षम बना सके। हाल में ही नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ हुई हिंसक झड़प को लेकर प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देश का नाम लिए बिना ही यह चेतावनी दे दी कि पड़ोसी केवल वे नहीं होते, जिनसे हमारी भौगोलिक सीमाएं जुडी होती हैं, जिनसे हमारे दिल मिल जाएं वे भी हमारे अच्छे पड़ोसी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने 7वें स्वतंत्रता दिवस संदेश में चीन, पाकिस्तान और नेपाल को भी बातों-बातों में यह संदेश दे दिया है कि वे भारत के साथ एक अच्छे पड़ोसी की तरह पेश आते हुए सीमा पर शरारतें बंद करें। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री की इस परोक्ष नसीहत का पड़ोसी देशों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

लेखक- कृष्णमोहन झा

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