जानें क्यों महिलाएं लगाती हैं सिंदूर और क्या है इसका इतिहास

लखनऊ डेस्क: हिन्दू धर्म की मान्यता सिंदूर का चलन भले ही पौराणिक समय से रहा हो, लेकिन तब से आज के आधुनिक युग तक इसका सबसे बड़ा महत्व एक स्त्री के लिए उसके पति की लंबी उम्र की कामना और विवाहित होने के दर्जे से ही है। आइये जानें इसका इतिहास –

धार्मिक और पौराणिक कथाओं में भी इसका वर्णन मिलता है, जिसके अनुसार देवी माता पार्वती और मां सीता भी सिंदूर से मांग भरती थीं। ऐसा कहा जाता है कि पार्वती अपने पति शिवजी को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए सिंदूर लगाती थीं। मां सीता अपने पति राम की लंबी उम्र की कामना तथा मन की खुशी के लिए सिंदूर लगाती थीं। महाभारत महाकाव्य में द्रौपदी नफरत और निराशा में अपने माथे का सिंदूर पोंछ देती हैं। सिंदूर स्त्रियां विवाह के बाद ही लगा सकती हैं। विवाह एक पवित्र बंधन है। इस पवित्र बंधन में बंधने से पहले कई रस्में संपन्न होती हैं। इनमें सबसे अहम सिंदूरदान है।

यह मान्यता रीति-रिवाज मानने वाली स्त्रियां ही लगाती हैं, लेकिन देखा जाए तो इसका चलन कम जरूर हुआ था, मगर खत्म कभी नहीं हुआ। अब इसे हर तबके की स्त्रियां लगाती हैं। किसी के लिए यह स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक ताकत से जुड़ा है, तो वहीं सेलिब्रिटीज के लिए यह एक फैशन स्टेटमेंट बन चुका है।

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