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तराई में कुटीर उद्योग कच्ची शराब का धंधा बनता जा रहा

 

बहराइच (आरएनएस) तराई में कच्ची शराब का धंधा कुटीर उद्योग का रूप लेता जा रहा है। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कच्ची शराब के बनाने के लिए अवैध भट्ठियां धधक रहीं हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लीटर शराब एक जगह से बनाकर दूसरे स्थानों पर बिक्री के लिए भेजी जाती है। लेकिन इस पर अंकुष लगाने के लिए आबकारी व पुलिस महकमा कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
जनपद के थाना रामगांव, जरवल, मिहींपुरवा, मोतीपुर, हुजूरपुर अंर्तगत विभिन्न स्थानों पर शराब की भट्ठियां धधक रहीं हैं। इन स्थानों पर कच्ची शराब बनाकर जनपद के विभिन्न स्थानों पर बिक्री के लिए भेजी जाती है। शराब के इस अवैध धंधे में पुरुषों के साथ ही काफी संख्या में बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। शराब की तस्करी में पुरुषों द्वारा महिलाओं व बच्चों को जानबूझकर शामिल किया जाता है। जिससे यदि यह पुलिस अथवा आबकारी विभाग के हत्थे चढ़ भी जाये ंतो कानून की आड़ लेकर यह अपना बचाव कर सकें। सूत्रों के मुताबिक कच्ची शराब की तीव्रता बढ़ाने के लिए उसमें नौसादर, यूरिया समेत विभिन्न नषीली दवाओं की मिलावट भी की जा रही है। ऐसे में कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। कच्ची शराब के धंधे पर अंकुष लगाने के लिए आबकारी विभाग व पुलिस विभाग की ओर से कोई अभियान नहीं चलाता जाता। षिकायतें बढ़ने पर आबकारी विभाग कभी कभी प्रवर्तन अभियान चलाने का दिखावा करते हुए दो.चार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई कर खानापूर्ति कर देता है।

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