राजनीति में दलितद्वेष की वजह से धर्म बदलेंगी मायावती….

राजनीति– महाराष्ट्र के नागपुर में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा व कांग्रेस पर हमला बोला और धर्म परिवर्तन की बात कही. बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की वजह भाजपा को बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार दलितद्वेष की राजनीति कर रही है. इसलिए वो ऐसा कदम उठाने को मजबूर है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जैसा हिंदुत्ववादी संगठन यदि दलित विरोधी मुहिम को विराम नहीं देते तो डॉ. भीमराव अंबेडकर की तर्ज पर वह भी करोड़ों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेंगी.

उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की विचारधारा दलितों के प्रति एक समान है. मायावती का यह बयान इसलिए मायने रखता है क्योंकि सन् 1956 में नागपुर में ही अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. मायावती ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था, जबकि वह करोड़ों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण करेंगी.

बसपा प्रमुख ने भाजपा के कथित दलित प्रेम पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री भले ही दलित समाज से हों, लेकिन यदि वे दलित विरोधी पार्टी से हैं तो उससे देश के दलितों का भला नहीं हो सकता. बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपानीत सरकार रईसों की पार्टी है इसलिए दलितों के कल्याण के बारे में नहीं सोचती.

मायावती ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि मंदिर से सिर्फ पुजारियों का भला होगा. वह चाहे अयोध्या का राम मंदिर हो या कोई अन्य मंदिर. इसलिए मंदिर की राजनीति के बजाए विकास की राजनीति होनी चाहिए.

 

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