मोदी लहर के दम पर जीती थी: खीरी लोकसभा सीट 

 

 

लखीमपुर: उत्तर प्रदेश की 28वीं लोकसभा सीट खीरी इस समय भारतीय जनता पार्टी के पास है. पीलीभीत से सटी इस सीट पर जनता का रुख काफी रोचक रहा है, इस सीट पर पार्टियों ने लगातार तीन-तीन बार जीत दर्ज की है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अजय कुमार मिश्र ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. इस सीट को लखीमपुर खीरी के नाम से भी जाना जाता है.

खीरी लोकसभा क्षेत्र का इतिहास

आजादी के बाद इस सीट पर 1957 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए, इन चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की. लेकिन उसके बाद 1962 से 1971 तक यहां कांग्रेस का राज रहा. आपातकाल के बाद 1977 में जब चुनाव हुए तो कांग्रेस को यहां नुकसान उठाना पड़ा और भारतीय लोकदल ने यहां पर जीत दर्ज की.

लेकिन अगले ही चुनाव में कांग्रेस ने यहां जबरदस्त वापसी की, 1980, 1984, 1989 में कांग्रेस बड़े अतंर से जीती. 1990 के दौर में चले मंदिर आंदोलन ने यहां भारतीय जनता पार्टी को भी फायदा पहुंचाया, 1991 और 1996 में यहां से बीजेपी चुनाव जीती.

हालांकि, मंदिर आंदोलन के बाद ही वर्चस्व में आई समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को अगले ही चुनाव में करारी मात दी. 1998, 1999 और 2000 के चुनाव में समाजवादी पार्टी यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीती. 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की और साल 2014 में ये सीट BJP की झोली में चली गई.

खीरी लोकसभा का सामाजिक समीकरण

खीरी जिले की अगर आबादी को देखें तो यहां करीब 20 फीसदी मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं. 2014 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर कुल 17 लाख वोटर हैं. जिसमें से 9लाख वोटर पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला मतदाता हैं.

इस सीट के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा आती हैं,  जिसमें पलिया, निघासन, गोला गोकरनाथ, श्रीनगर और लखीमपुर आते हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने ही जीत दर्ज की थी.

2014 में कैसा रहा जनादेश

पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था. बीजेपी के अजय कुमार मिश्र को यहां करीब 37 फीसदी वोट हासिल हुए थे, जबकि बसपा प्रत्याशी 27 फीसदी वोट मिले थे. इस सीट पर कांग्रेस के जफर नकवी तीसरे और समाजवादी पार्टी चौथे स्थान पर रही थी. 2014 में यहां कुल64 फीसदी मतदान हुआ था.

स्थानीय सांसद का प्रोफाइल और प्रदर्शन

यहां से सांसद अजय कुमार मिश्रा का राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं है. 2012 में अजय कुमार निघासन विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. इसके बाद 2014 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए.

अगर संसद में प्रदर्शन की बात करें तो वह सदन में काफी एक्टिव रहे हैं. 16वीं लोकसभा में उन्होंने कुल 240 बहस में हिस्सा लिया और 464 सवाल पूछे. अजय कुमार ने इस दौरान सरकार की ओर से कई बिल पेश किए, साथ ही प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किए. अजय कुमार पर धारा 302 के अलावा कुल 3 केस दर्ज हैं. उन्होंने अपनी सांसद निधि में से करीब 87 फीसदी राशि खर्च की है.

 

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