सात साल बाद ‘निर्भया’ को मिला इंसाफ, चारों दोषियों को दी गई फांसी

नई दिल्‍ली। साल 2012 में देश की राजधानी दिल्‍ली में हुए ‘निर्भया’ केस के चारों दोषियों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को सुबह ठीक 5:30 बजे फांसी पर लटकाकर मौत की सजा दे दी गई है। निचली अदालत से शीर्ष न्‍यायालय तक दिन में फांसी रुकवाने की सभी चालें नाकाम होने के बावजूद निर्भया के दरिंदे मौत से बचने के लिए आखिरी पल तक तिकड़म में लगे रहे। देर रात हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने पर गुनहगारों के वकील रात डेढ़ बजे सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के घर पहुंचे।

दोषियों के वकील की याचिका पर रात ढाई बजे सुप्रीम कोर्ट खुला। जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और एएस बोपन्ना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की और करीब 50 मिनट सुनवाई के बाद पीठ ने फांसी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिका आधारहीन है।

इसके साथ ही सात साल, तीन माह और तीन दिन बाद शुक्रवार सुबह 5:30 बजे विनय शर्मा, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर और मुकेश सिंह को फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, इनमें से तीन दोषियों ने निचली अदालत द्वारा फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ गुरुवार रात दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। रात करीब 10 बजे हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने भी याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने दोषियों के वकील से सख्त लहजे में कहा कि अब आपके मुवक्किलों का ऊपरवाले से मिलने का वक्त आ गया है। इसके बाद दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन यहां भी उनके हाथ केवल मायूसी ही लगी।

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