Breaking News

उम्मीद है महिलाओं के लिए प्राथमिकी प्रक्रिया सुधरेगी

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘पिंक’ में ‘जीरो एफआईआर’ प्रणाली पर प्रकाश डाला गया और साथ ही इस पर रोशनी डाली गई कि कितनी महिलाओं को उन कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में नहीं पता, जो उनकी मदद कर सकती हैं।

इस मुद्दे पर फिल्म में वकील के किरदार में नजर आए मेगास्टार अभिनेता अमिताभ बच्चन का कहना है कि मंत्रियों ने इस बात की उम्मीद दिलाई है कि महिलाओं के लिए एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को जल्द ही आसान बनाने के लिए कानून में कुछ बदलाव किए जाएंगे।

‘पिंक’ एक फिल्म से अधिक एक अभियान है। इस फिल्म के प्रभाव की उम्मीद के बारे में पूछे जाने पर अमिताभ ने कहा, “हमने नहीं सोचा था, लेकिन जिस प्रकार की प्रतिक्रिया हमें मिली है और जिस प्रकार का प्रभाव इसने निजी तौर पर लोगों पर डाला है, विशेषकर महिलाओं पर उससे काफी खुश हूं।”

इस फिल्म ने काफी अच्छी कमाई की है और समय गुजरने के साथ इसकी कमाई में बढ़ती जा रही है। इसके इस स्तर को छूने की संभावना के बारे में अमिताभ ने कहा, “लोगों की जुबान फिल्म के लिए काफी काम करती है। इसके लिए एक अलग से कोई विपणन क्षेत्र नहीं होता। हालांकि, कहीं न कहीं शूजित सरकार ने काफी आत्मविश्वासी काम किया है। लोगों ने जब यह फिल्म देखी, उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया दी और इसका प्रचार किया। यहीं असल में हुआ।”

काफी कम फिल्मों में ही लोगों की मानसिकता को बदलने की क्षमता होती है और ‘पिंक’ उनमें से एक है। इस अभियान में किसी अन्य फिल्म को जोड़ने के बारे में पूछे जाने पर अमिताभ ने कहा कि हर फिल्म का अपना एक अलग संदेश होता है। अभिनेता के लिए अन्य फिल्मों में कोई भिन्नता नहीं होती, क्योंकि यह बेकार की चीज होती है।

महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को उठाने वाली और एफआईआर दर्ज करने की प्राथमिकता दर्शाने वाली ‘पिंक’ के बारे में अपने बयान में अमिताभ ने कहा कि कुछ सरकारी मंत्रियों ने इसे देखा है और उन्होंने एक उम्मीद बंधाई है कि वे कानूनों में बदलाव करेंगे।

‘पिंक’ में इस बात को साफ स्पष्ट किया गया है कि एक महिला की ना का मतलब ना होता है। देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों के कम होने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर अमिताभ ने कहा, “मेरा मानना है कि शिक्षा, कानून, नैतिक और सामाजिक क्षेत्र में बदलाव की प्रक्रिया में सचेत प्रयास से परिणाम देखने को मिल सकते हैं। माता-पिता के संस्कार और युवाओं में कुछ मूल्यों का होना काफी जरूरी है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*