गहलोत सरकार पर मंडरा रहे है खतरे के बादल, बीजेपी के लिए मौका

राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के लिए संकट के बादल गहराते जा रहे हैं | करीब पौने दो साल पहले राजस्थान में सत्ता में आई कांग्रेस 23 दिन पहले राज्यसभा चुनाव के बाद पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही थी। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच तनातनी के पीछे अभी तक केवल एक वजह सामने आई है। वो है, सरकार को अस्थिर करने की साजिश की जांच के लिए पुलिस द्वारा पायलट को 10 जुलाई को बुलाना।

विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में एसओजी (विशेष संचालन समूह) की ओर से पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद राज्य के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे हैं।रविवार को दिनभर जयपुर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की गतिविधियां तेज रहीं। गहलोत की दिन में कई बार राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल व राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे से बात हुई।

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के अनुसार अपने उपमुख्यमंत्री के प्रति राजस्थान के सीएम का गहरा अविश्वास है और यही वजह है कि साल 2018 में बनी सरकार हाशिए पर खड़ी है। सूत्रों के अनुसार, 30 कांग्रेसी विधायक और कुछ निर्दलीय विधायक सचिन पायलट के संपर्क में हैं और उन्होंने जो भी फैसला किया है, उस पर अपना समर्थन देंगे |राजस्थान में गहलोत की अगुवाई वाली सरकार के पिछले दो सालों के कार्यकाल में ऐसे कई मौके पर पायलट को नीचा दिखाने का काम किया गया है। लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने चेतावनी के संकेतों की अनदेखी की।

इससे पहले पायलट ने शनिवार देर रात दिल्ली में अहमद पटेल से मुलाकात की थी। पायलट ने अहमद पटेल से मुलाकात के बाद रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी को साफ संदेश पहुंचा दिया कि गहलोत उन्हें साइडलाइन करने में जुटे हैं, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे।

गहलोत सरकार का बीजेपी पर हमला

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा भाजपा पर अपनी सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि वह पार्टी को लेकर चिंतित हैं। सिब्बल ने इस ‘संकट’ से तुरंत निपटने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व कब ‘जागेगा’? उन्होंने ट्वीट किया, ‘पार्टी को लेकर चिंतित हूं। क्या हम तब जागेंगे जब हमारे हाथ से सब कुछ निकल जाएगा।’

पायलट और ज्योतिरादित्य की दोस्ती, भाजपा नेताओं से संपर्क और सीएम से नाराजगी जैसे इन सारे तारों को जोड़ने के बाद साफ है कि गहलोत सरकार पर खतरे के बादल हैं। इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या कांग्रेस के असंतुष्ट गुट के साथ मिलकर भाजपा मध्य प्रदेश और कर्नाटक की कहानी राजस्थान में भी दोहरा सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर गहलोत पर सरकार पर सियासी सर्जिकल स्ट्राइक होती है तो उसमें ज्योतिरादित्य की भूमिका को भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, जो स्थिति कमलनाथ सरकार में ज्योतिरादित्य की थी। कुछ वैसी ही गहलोत सरकार में सचिन पायलट की है।

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