राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला की अंतिम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच गुरुवार को अयोध्‍या मामले में राम – मंदिर और बाबरी मस्जिद का की आखिरी सुनवाई  चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्‍दुल नजीर की बेंच 13 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी। वरिष्‍ठ वकील व कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल की ओर से इस मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव तक डालने की अपील की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने ठुकरा दिया।

 

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अयोध्‍या में कुल 2.7 एकड़ की विवादित जमीन पर हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों ने दावा ठोंक रखा है। 5 दिसंबर, 2017 को बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की थी। कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्‍बल, राजीव धवन और दुष्‍यंत दवे जैसे वरिष्‍ठ वकीलों ने देश के राजनैतिक हालात को देखते हुए सुनवाई टालने की गुहार लगाई थी।

 

अब न्यायधीशो के हाथो में होगा राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का फैसला

वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने कहा था कि दीवानी अपीलों को या तो पांच या सात न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा जाए या इसे इसकी संवेदनशील प्रकृति तथा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने बाने और राजतंत्र पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए 2019 के लिए रखा जाए। शीर्ष अदालत ने भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ 14 दीवानी अपीलों से जुड़े एडवोकेट आन रिकार्ड से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी जरूरी दस्तावेजों को शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को सौंपा जाए।

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