लखनऊ

रालोद बोला, गठबंधन तय पर सीटों का बंटवारा नहीं

नितिन अवस्थी
लखनऊ। लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती की हो रही संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा कि ये ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों गुरू-चेले की नींद उड़ाने वाली है।

मायावती ने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने से आज देश का युवा, किसान व महिलाएं सब परेशान हैं। इसलिए 1993 में गेस्ट हाउस कांड को देश व जनहित के लिए पीछे छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन से देश को बड़ी उम्मीद है। हम कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए सीट छोड़ने से गठबंधन कमजोर होता है।
मायावती ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस की नीतियां एक ही हैं। बोफोर्स के कारण कांग्रेस की सरकार चली गई। इसी तरह राफेल के कारण भाजपा की सरकार भी चली जाएगी।
मायावती ने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने से आज देश का युवा, किसान व महिलाएं सब परेशान हैं। इसलिए 1993 में गेस्ट हाउस कांड को देश व जनहित के लिए पीछे छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन से देश को बड़ी उम्मीद है। हम कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए सीट छोड़ने से गठबंधन कमजोर होता है।
मायावती ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस की नीतियां एक ही हैं। बोफोर्स के कारण कांग्रेस की सरकार चली गई। इसी तरह राफेल के कारण भाजपा की सरकार भी चली जाएगी।
मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की 80 सीटों पर गठबंधन फाइनल हो चुका है। सपा 38 व बसपा 38 सीटों पर लड़ेगी। कांग्रेस के लिए अमेठी व रायबरेली की दो सीटें छोड़ दी है। जबकि बाकी सीटें गठबंधन के अन्य सहयोगियों को दी जाएंगी।

खास बात यह है कि सपा-बसपा के गठबंधन के एलान के लिए साझा प्रेस कांफ्रेंस उसी जगह होने जा रही है जहां 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी व अखिलेश यादव ने साझा प्रेस कांफ्रेंस करके गठबंधन की घोषणा की थी।

राष्ट्रीय लोकदल के किसी नेता के कल की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने के बारे में अभी कोई सूचना नहीं है। पर, चौधरी अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत के रुख से रालोद का भी इस गठबंधन में रहना तय माना जा रहा है।

पहले गठबंधन की औपचारिक घोषणा 15 जनवरी को बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के जन्मदिन के मौके पर होनी थी। पर, उसी दिन कुंभ का पहला और महत्वपूर्ण स्नान है शायद इसीलिए गठबंधन की औपचारिक घोषणा की तारीख बदली गई।
इसके पीछे मंशा यह भी है कि गठबंधन की घोषणा को मीडिया में पूरा महत्व और स्थान मिले तथा इसकी चर्चा भी हो सके। उम्मीद है कि कल की घोषणा में यह भी साफ हो जाएगा कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा और रालोद को इस गठबंधन में कितनी सीटों की हिस्सेदारी मिलेगी।

रालोद बोला, गठबंधन तय पर सीटों का बंटवारा नहीं
रालोद का भी इस गठबंधन में शामिल रहना लगभग तय है। रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने शुक्रवार को यह तो स्वीकार किया कि गठबंधन तय है लेकिन सीटों के बंटवारे पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कांग्रेस के इस गठबंधन में शामिल होने या न होने पर भी कहा कि सपा और बसपा बड़े दल है। वही इस बारे में तय करेंगे। याद रहे कि मंगलवार को अजित सिंह के पुत्र और रालोद उपाध्यक्ष जयंत लखनऊ में सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिले थे। उन्होंने भी कहा था कि गठबंधन तय है लेकिन सीटों पर अभी कोई बात नहीं हुई है। हालांकि सूत्रों ने बताया था कि रालोद ने छह सीटें मांगी है पर उसे तीन-चार सीटें मिल सकती हैं।

पच्चीस वर्षों बाद सपा-बसपा साथ
लगभग पच्चीस वर्षों बाद सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे। जहां तक लोकसभा चुनाव का सवाल है तो पहली बार दोनों पार्टियां परस्पर गठबंधन करके मैदान में उतरने जा रही हैं। इससे पहले 1993 में दोनों पार्टियों ने विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया था। उस समय यह गठबंधन बसपा के तत्कालीन सर्वेसर्वा कांशीराम और सपा के उस समय मुखिया मुलायम सिंह यादव के बीच बातचीत के बाद हुआ था। हालांकि मायावती भी उस समय सक्रिय राजनीति में आ चुकी थीं और कांशीराम के बाद बसपा में महत्वपूर्ण भूमिका में थीं। संयोग यह है कि तब भी भाजपा को रोकने के लिए दोनों दल एक साथ आए थे और इस बार भी गेस्ट हाउस कांड की दुश्मनी भुलाकर भाजपा को रोकने के लिए ही दोनों दल एक साथ आ रहे हैं।

38-38 सीटों पर समझौता हुआ।
बताया जा रहा है कि सपा और बसपा के बीच 38-38 सीटों पर सहमति बन गई है। दो सीटें रायबरेली व अमेठी कांग्रेस के लिए छोड़ने का फैसला किया गया है। शेष सीटें रालोद व गठबंधन में शामिल होने वाले अन्य दलों को दी जा सकती हैं।

मायावती मीडिया बंधुओं आपको जैसा कि सर्वविदित है आज समाजवादी पार्टी के साथ बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन का ऐलान है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह अर्थात दोनों गुरु और चेले की नींद उड़ाने वाली प्रेस वार्ता हो रही है इसकी पृष्ठभूमि यह है कि हमारे परम पूज्य बाबा भीमराव अंबेडकर ने जो दलितों के लिए सफर तय किया उन्होंने जो प्रयास किए उससे दबे कुचले लोगों को मान-सम्मान से जीवन यापन करने का मिशनरी लक्ष्य को जमीनी हकीकत में बदला और लोहिया जी के बताए हुए रास्तों पर चल रही सपा पहले भी 1993 में माननीय कांशीराम और मुलायम सिंह यादव दोनों के संयुक्त नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य में हवा का रुख बदलते हुए सांप्रदायिक पार्टी को हटाने के लिए 1995 में घटे गेस्ट हाउस कांड के बाद टूट गया था लेकिन हमने एक बार फिर संप्रदायिक ताकतों को हटाने के लिए फिर से गठबंधन करने का फैसला लिया है। जैसे उस समय 1990 के आसपास बीजेपी की घोर जातिवादी सांप्रदायिक संकीर्ण उन्माद एवं हिंसा आदि के जहरीले विचारों के कारण आम जनता बुरी तरीके से त्राहि त्राहि कर रही ठीक उसी प्रकार से आज भी देश की लगभग सवा सौ करोड़ जनता गरीब किसान मजदूर व्यापारी इनके अहंकारी नीतियों के के कारण परेशान व दुखी हैं। इसी कारण से हम बीएसपी और सपा ने देश के खातिर और खासकर उत्तर प्रदेश के जनता के हित के लिए आम जन भावनाओं का पूरा ख्याल रखते हुए देश के जल्द ही होने वाले आम चुनाव को दोनों एक साथ लड़ने का फैसला किया है यह निश्चित ही नए वर्ष 2019 राजनीतिक क्रांति का वर्ष माना जाएगा बीएसपी और सपा के गठबंधन से समाज को नई उम्मीदें जाग गई है क्योंकि यह चुनाव जीतने के लिए दो पार्टियों का ही एकजुट होना मात्र नहीं है जबकि यह समाज के अधिकांश आबादी के गरीबों मजदूरों किसानो छोटे व मझोले व्यापारियों युवाओं एवं बेरोजगारों एवं महिलाओं को दलित शोषित व पिछड़ों मुस्लिमों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए एक नई शक्ति भी है एक बेहतरीन कल को बनाने वाली सामाजिक परिवर्तन आर्थिक क्रांति का नया आंदोलन भी बन सकता है

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