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दुनिया के उपर मंडरा रहा ऐसा खतरा जिसे रोकना मुश्किल….जाने इस खतरे की शक्ति

जिसको चेतावनियों की आज तक कभी परवाह नहीं। अगर उसने परवाह की होती तो फिर एक के बाद एक छह परमाणु परीक्षण करने का दुस्साहस वह नहीं दिखाता। पिछले दिनों उसने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासोंग-15 का परीक्षण करके अमेरिका को एक बार फिर आंख दिखाई। जी हां, हम उत्तर कोरिया की ही बात कर रहे हैं। आज हम उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम के विभिन्न पड़ावों और वहां के तानाशाह किम जोंग उन के उन निशानों के बारे में बताएंगे, जिन पर वह हमला कर सकता है।

उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम

उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम 1987 से शुरू होता है। पिछले 30 साल में उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम इतना घातक रुख अख्तियार कर चुका है कि वह अब सारी दुनिया के लिए खतरा बन गया है।

1987-92: इस दौरान उसने स्कड-सी (मारक क्षमता पांच सौ किमी) जैसी मिसाइल, रोडोंग-1 (1300 किमी), ताइपोडोंग-1 (2500 किमी), मुसुदन-1 (3000 किमी) और ताइपोडोंग-2 (6700 किमी) का निर्माण शुरू किया।

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1998: जापान के ऊपर से ताइपोडोंग-1 का परीक्षण किया।

9 मार्च, 2016: थर्मो न्यूक्लियर वारहेड को लघु रूप में निर्मित किए जाने की घोषणा।

23 अप्रैल, 2016: पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।

तीन अगस्त, 2016: जापान के समुद्री क्षेत्र में पहली बार सीधी बैलिस्टिक मिसाइल दागी।

 

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण

पहला परीक्षण: नौ अक्टूबर, 2006 को उत्तर कोरिया ने पहला परमाणु परीक्षण किया। इससे एक किलोटन से कम विस्फोटक ऊर्जा उत्पन्न। 4.3 तीव्रता का भूकंप आया।

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दूसरा परीक्षण: 25 मई, 2009 को दूसरे परीक्षण में 2.35 किलोटन की विस्फोटक ऊर्जा निकली और 4.7 तीव्रता का भूकंप आया।

तीसरा परीक्षण: 12 फरवरी, 2013 को तीसरे परीक्षण में 16 किलोटन विस्फोटक ऊर्जा निकली। 5.1 तीव्रता का भूकंप आया।

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चौथा परीक्षण: छह जनवरी, 2016 को चौथे परीक्षण से 15.5 किलोटन विस्फोटक ऊर्जा निकली। इसे हाइड्रोजन बम बताया। 5.1 तीव्रता का भूकंप आया।

पांचवां परीक्षण: नौ सितंबर, 2016 को पांचवें परीक्षण में 30 किलोटन तक विस्फोटक ऊर्जा निकली। 5.3 तीव्रता का भूकंप आया।

छठा परीक्षण: तीन सितंबर, 2017 को हाइड्रोजन बम का परीक्षण। 50 किलोटन ऊर्जा निकली। 6.3 तीव्रता का भूकंप आया।

2017 में बनाई अमेरिका तक पहुंच

14 मई: जापान सागर में ह्वासोंग-12 मिसाइल गिराई। सात सौ किमी दूरी तय की।

4 जुलाई: ह्वासोंग-14 दागी। अमेरिका के अलास्का तक पहुंच का दावा।

28 जुलाई: दस हजार किमी की दूरी तक मार करने वाली केएन-14 का परीक्षण

29 अगस्त: जापान के ऊपर से छह हजार किमी तक वार करने वाली ह्वासोंग-12 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।

15 सितंबर: ह्वासोंग-12 का परीक्षण किया।

क्या विश्व भर के विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों ने किम जोंग उन के गद्दी संभालने के बाद से अब तक उत्तर कोरिया की मीडिया में चल रही रिपोर्टों और वहां मौजूद सूत्रों के हवाले से 15 ठिकानों की सूची तैयार की है। इसमें उन मिसाइलों का अध्ययन भी शामिल किया गया है, जिनके दम पर किम अमेरिका को हमले की धमकी देता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि परमाणु हमले की धमकी देने वाला किम जोंग उन तभी ऐसे हमले कर सकता है जब उसे अपने देश पर खतरा मंडराने का अंदेशा होगा।

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