विजयदशमी के त्योहार रावण दहन पर इस साल लगा जीएसटी का ग्रहण        

हर साल की तरह इस साल भी रावण दहन पर शहर में ज़ोरो शोरो से तैयारियां हो रही है | विजयदशमी का त्यौहार इस लिए मनाया जाता है क्यूंकि  दशहरे के दिन ही भगवान् श्री राम ने लंका दीपति रावण का वध कर सीता मैया को मुक्त कराया था | इसलिए ये त्यौहार बुराई पे अच्छाई का प्रतीक माना जाता है | हर साल मनाते आ रहे त्योहार पर इस बार पारम्परिक रावण दहन पर महंगाई की मार पड़ी है।

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महंगाई का आलम अब यह हो चुका है कि परम्पराओं पर भी इसका खतरा मड़राने लगा है नतीजा यह रहा  कि आगामी रावण दहन और इससे जुड़े अन्य कार्यक्रम भी डायन महंगाई से अछूते नहीं रहे। नए कर जीएसटी से तो इस पर ग्रहण सा लग चुका है। रावण दहन की तैयारी से लेकर इसकी साज – सज्जा और होने वाली झांकी पर जीएसटी का बुरा असर पड़ा है। देश में इस तरह का नया कर लागू होने से पारम्परिक कार्यक्रमों की तो कमर तोड़ दी है।

एक समय था जब पूरे देश में विजयदशमी त्यौहार को लेकर बेहद हर्षोउल्लास हुआ करता था। जगह – जगह तैयारियों की रौनक अहसास करा देती थी कि विजयदशमी बस करीब ही है। बात आज के परिवेश की करें तो विजयदशमी की वो तैयारियां और रौनक नदारद हो गई है। अब कही – कही राजधानी में इसकी तैयारियां देखने को मिल रही है। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि पारम्परिक त्योहारों पर पड़ी महंगाई की मार है। रही – सही कसर जीएसटी ने पूरी कर दी।

विजय दशमी, रावण दहन और झांकी की तैयारी इसके लिए साज – सज्जा के सामान मसलन रावण के ढांचे को बनाने के लिए लकड़ी इसके बाद ढकने के लिए सजावटी पेपर, झांकी में किरदार निभाने वाले कलाकारों के परिधान और सजावट का अन्य सामान लगभग सब कुछ पर जीएसटी की बुरी मार पड़ी है। अब जब इस जीएसटी का असर है तो यह भी साफ है कि विजयदशमी के रावण दहन और इससे जुडी अन्य तैयारियों पर इसकी मार भी पड़ना तय है।

एक तो महंगाई की मार ऊपर से जीएसटी की मार ने तो व्यापारियों को पहले से ही तोड़ दिया लेकिन जिस तरह से विजयदशमी के रावण और इससे जुड़ी तैयारियों पर इसका काला साया पड़ा है यह भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।

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