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ये है रंग महल का सच जाने क्यों बनवाया था बीरबल ने ये महल

 

इस बात के सैकड़ों प्रमाण हैं कि मुग़ल बादशाह अकबर के दौर में बीरबल काफी प्रभावी लोगों में शुमार किए जाते थे, मगर ये बात शायद सभी को ना पता हो कि बीरबल का राजदरबार के फैसलों में भी काफी दखल होता था। इतिहासकार इस नतीजे पर भी पहुंचे हैं कि बीरबल जहां एक ओर अपने हास्य-विनोद के लिए जाने जाते थे, वहीं दूसरी ओर वे अपनी हाज़िरजवाबी और समझदारी भरे लहज़े के लिए भी मशहूर थे।

 

 

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जब भी अकबर को किसी महफूज़ जगह जाना होता था या फिर आरामगाह की तलाश होती थी, तो बीरबल उस काम को बड़े ही सलीके के साथ अंजाम देते थे। इसी की एक मिसाल बीरबल ने पेश की थी हरियाणा में रंगमहल’ बनवाकर! बुजु़र्गों की मानें तो सैकड़ों साल पहले हरियाणा के बूडिया में बने इस दो मंज़िला भवन को मुग़ल बादशाह अकबर की रानियों के विश्राम के लिए बीरबल ने बनवाया था। ऐसे भी प्रमाण सामने आए हैं, जिनके आधार पर ये कहा जा सकता है कि यहां पर अकबर बादशाह कई महीनों तक रहे थे।

 

रानियों के लिए बनाए गए इस भवन को अकबर के दौर से ही रंगमहल के नाम से जाना जाता है। दो मंज़िला वाले इस भवन को कारीगरों ने छोटी ईंटों व चूने से तैयार किया था। मज़ेदार बात ये है कि इस भवन में कहीं भी लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया गया है।  रंगमहल अपने शुरुआती वक्त में बाग़ के बीचों-बीच में था, इसके अलावा यहां पर एक कुआं भी था, लेकिन अब इन तमाम चीज़ों की तस्दीक केवल निशानदेही के आधार पर ही की जा सकती है। इस रंगमहल की एक शानदार ख़ासियत यह थी कि इसे हवादार बनाया गया था और इसके सारे दरवाजे़ एक समान थे।

 

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि मुग़ल बादशाह अकबर के नौ रत्नों में शामिल बीरबल की बूड़िया नगरी वक्त के साथ अपनी बेमिसाल और तारीखी विरासत की चमक खो रही है, क्योंकि अफ़सोस की बात ये है कि मुग़लकालीन रंगमहल जर्जर हो गया है। इसकी एक वजह यहां पर बने प्राचीन स्थलों का कायदे से रख-रखाव न होना है। बूडिय़ा क़स्बे से लगते रकबे में सैकड़ों साल पहले बना रंगमहल कभी भी ढ़ह सकता है। खा़लिस चूने व छोटी र्इंटों से बने इस भवन का कुछ हिस्सा गिर भी गया है।

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