त्रिपुरा : शनिवार को जनजातीय पार्टियों ने बंद का आह्वान किया, कांग्रेस ने किया समर्थन

अगरतला| त्रिपुरा में छह जनजातीय पार्टियों ने शनिवार को बंद का आह्वान किया है। यह बंद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ इस सप्ताह की शुरुआत में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह युवकों के घायल होने के विरोध में आहूत किया गया है। इंडिजेनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) की अगुवाई में इन पार्टियों ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के इस्तीफे की मांग करने के साथ ही उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से मामले की न्यायिक जांच कराने, घायल युवाओं के परिवारों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने या सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

आईएनपीटी के महासचिव जगदीश देबबर्मा ने यहां मीडिया से कहा, “भाजपा नेतृत्व वाली सरकार की पुलिस ने निहत्थे निर्दोष लोगों पर उस समय गोलियां चलाईं, जब वे विधेयक के खिलाफ मंगलवार को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे थे। हमने गोलीबारी का विरोध करने के लिए बंद का आह्वान किया है।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले विपक्षी वाम मोर्चे ने बंद का विरोध किया है।

कांग्रेस ने बंद का समर्थन किया है।

त्रिपुरा प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्जी ने मीडिया को बताया, “जनजातीय पार्टियों, जिन्होंने बंद का आह्वान किया है, का जनता के बीच कोई आधार नहीं है। ये दल और माकपा राज्य सरकार के खिलाफ साजिश कर रहे हैं।”

वाम मोर्चा के संयोजक बिजन धर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मंगलवार की घटना में कम से कम 20 लोग घायल हो गए, जिनमें से 11 का इलाज अगरतला के अस्पतालों में और एक का कोलकाता के एक अस्पताल में चल रहा है।

भाजपा की सहयोगी इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) की सहयोगी ने उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

इस बीच, नॉथ-ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (नेसो) के वे छह नेता गुरुवार को त्रिपुरा पहुंचे जिन्होंने नागरिकता विधेयक का विरोध करने के लिए मंगलवार को पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में 11 घंटे के बंद का आह्वान किया था।

नेसो के नेता समुज्जल भट्टाचार्य ने शुक्रवार को यहां मीडिया से बात करते हुए गोलीबारी की घटना की निंदा की और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

कांग्रेस, वाम दल और तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध के बीच, लोकसभा ने मंगलवार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित किया, जिसका मकसद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छह गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के प्रवासियों को भारत की नागरिकता प्रदान करना है।

बंद के आह्वान के मद्देनजर त्रिपुरा स्टेट राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, पैरा मिलिट्री असम राइफल्स और त्रिपुरा पुलिस को त्रिपुरा के ‘आदिवासी क्षेत्र स्वशासी जिला परिषद क्षेत्रों’ (टीटीएएडीसी) में तैनात किया गया है।

किसी प्रकार की अफवाह को रोकने के लिए मोबाइल आधारित इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को शनिवार अपरान्ह तीन बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

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