विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार

सीएए: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा UNHRC, विदेश मंत्रालय बोला- बर्दाश्त नहीं

नई दिल्‍ली। भारत सरकार के द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) का जहां देश की विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं, तो दुनिया के कुछ देशों ने भी आपत्ति जताई है। यूएनएचआरसी (संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग) की ओर से भारत की शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इस पर जवाब दिया और कहा कि कोई भी विदेशी पार्टी भारत के आंतरिक मामले में इस तरह हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

आज केंद्रीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में लिखा गया है, ‘जेनेवा में मौजूद हमारे मिशन को सोमवार को जानकारी मिली है कि संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमन राइट्स कमिश्नर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन एक्ट के मसले पर एक याचिका दायर की गई है।’

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘नागरिकता संशोधन एक्ट भारत का एक आंतरिक मसला है और भारतीय संसद को इस कानून को बनाने की ताकत है। हमें विश्वास है कि कोई बाहरी पार्टी इस भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।’

भारत सरकार ने अपने बयान में कहा कि नागरिकता संशोधन एक्ट भारत के संविधान की सभी वैल्यू को पूरा करता है। मानवाधिकार को लेकर देश के द्वारा किए गए वर्षों पहले किए गए बंटवारे के दौरान के वादे को पूरा करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जो कानून के आधार पर चलता है। भारत में कानूनी व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट में हमारा पक्ष स्पष्ट हो जाएगा।

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