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कटघरे में यूपी सीएम और बीजेपी कटघरे में, गोरखपुर मासूमों को नही मिला न्याय

हाल में हुए लोकसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी सीएम योगी के गृहजनपद गोरखपुर की वह सीट भी गँवा चुकी है जिस पर दशकों से पार्टी का कब्ज़ा था l चर्चा आम है कि गोरखपुर में बीजेपी की करारी हार के पीछे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बीते साल अगस्त महीने में ऑक्सीजन की कमी से मारे गए मासूमों और उनके सिसकते परिवारों की आह ने अहम रोल प्ले किया है l

 

 

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बहरहाल बीजेपी की गोरखपुर में हार के पीछे कारण चाहे जो भी रहे हों पर सूबे की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई कंसलटेंट और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा मुख्य सचिव कार्यालय में दायर की गई एक आरटीआई को हैंडल करने में योगी सरकार ने जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया है उससे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उनके अगुआई वाली सरकार योगी के गृहजनपद में हुए इस भीषण काण्ड के पीड़ितों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर कटघरे में खड़े नज़र आ रहे हैं l

 

मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे नामचीन लोगों में शुमार है नाम इनका-

 

बताते चलें कि लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे देश के नामचीन कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते साल के अगस्त महीने की 14 तारीख को यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई मासूमों की मौतों के सम्बन्ध में वित्तीय वर्ष 2017-18 के सम्बन्ध में 9 बिन्दुओं पर सूचना माँगी थी l

 

 

तमाम जांचों और दोषियों की सुचना मांगी थी संजय ने

 

संजय ने मेडिकल कॉलेज की ऑक्सीजन सप्लाई,घटना की मजिस्ट्रेटी जांच, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई पॉवर जांच, मारे गए बच्चों की पोस्ट मोरटम रिपोर्ट,प्राइवेट संस्थानों से खरीदी गई ऑक्सीजन और घटना के दोषियों को दिए गए दंड की सूचना माँगी थी l मुख्य सचिव कार्यालय के अनु सचिव एवं जन सूचना अधिकारी पी. के. पाण्डेय ने संजय का आवेदन बीते साल 21 अगस्त को उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को ट्रान्सफर किया था l

 

हालाँकि आरटीआई एक्ट के तहत सूचना देने के लिए अधिकतम 30 दिन की अवधि निर्धारित है लेकिन योगी सरकार ने मासूमों की मौत से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर निहायत असंवेदनशील रुख अपनाया और सूचना छुपाने के लिए RTI एक्टका उल्लंघन तक कर दिया l निराश संजय ने बीती साल 5 अक्टूबर को मामला उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग पहुंचा दिया l

 

बीती फरवरी में सूचना आयोग के नोटिस के बाद सूबे के चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के महानिदेशक कार्यालय की सम्बद्ध अधिकारी और जन सूचना अधिकारी प्रभा वर्मा ने बीती 6फरवरी को संजय का आवेदन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को अंतरित किया है l मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने बीती 6 फरवरी को पत्र लिखकर सूचना देने के लिए 15 अतिरिक्त दिनों की मांग की है परन्तु अभी तक संजय
को कोई भी सूचना नहीं दी है l

 

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एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने एक विशेष बातचीत में इस स्वतंत्र पत्रकार उर्वशी शर्मा को बताया कि नियमानुसार 30 दिन में मिल जाने वाली सूचना उन्हें 210 दिन बाद भी नहीं दी गईं हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है l बकौल संजय सूचना मुख्यमंत्री के गृह-जनपद में किये गए भ्रष्टाचार की बजह से हुई मासूमों की मौतों जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़ी थी जिसे सरकार को स्वतः स्फूर्त रूप से सार्वजनिक करना चाहिए था लेकिन सरकार द्वारा RTI के तहत भी सूचना देने के स्थान पर लगातार सूचना छुपाने के लिए प्रयासरत रहने से स्पष्ट है कि योगी सरकार ने इस भयावह मौतकाण्ड के मीडिया में लीक होने पर उस समय जांच बैठाने के नाम पर महज खानापूर्ति की थी और सरकार ने बाद में दोषियों को बचाने के लिए मामले की जांचों को ठन्डे बस्ते में डाल दिया है l

 

 

सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों पर बेबाकी से राय रखने के लिए विख्यात संजय ने इस आधार पर यूपी की सरकार और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर के मृत मासूमों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर पर
कटघरे में खड़ा कर दिया है l

 

एक संत की कथनी करनी में अंतर नहीं होने की बात कहते हुए समाजसेवी संजय ने संत से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ से उच्च अपेक्षाओं की बात कही है और अपने पंजीकृत सामाजिक संगठन ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष की हैसियत से पत्र लिखकर योगी से मामले में स्वयं दखल देकर गोरखपुर के मृत मासूमों को न्याय दिलाने की मांग रखने की बात इस स्वतंत्र पत्रकार उर्वशी शर्मा से की गई एक एक्सक्लूसिव वार्ता में कही है l

 

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