कल की यादें लौट आईं, कभी न भूलने वाला दौर था वह

एंटरटेनमेंट डेस्क। लॉकडाउन के दौरान जब दूरदर्शन पर ‘रामायण’ को फिर से इतना प्यार मिला तो दूरदर्शन के सुनहरे काल की यादें लौट आईं। कभी न भूलने वाला दौर था वह। दूरदर्शन 15 सितंबर को 61वीं वर्षगांठ मना रहा है। याद कीजिए वे दिन जब दूरदर्शन पर आ रहे ‘चित्रहार’ को देखने की बेताबी रहती थी। खबरें सुन लेने का इंतजार रहता था और ‘रामायण’, ‘महाभारत’ के हर शब्द को सुनने की आतवले रहते थे।

5 सितंबर 1959 को शुरू हुआ दूरदर्शन इस वर्ष अपनी 61वीं वर्षगांठ मनाएगा तो एक बार फिर दूरदर्शन की उस चमक को याद करने की बारी है।

जब प्रसारण सही नहीं मिलता था तो छत पर लगे कई फुट ऊंचे एंटिना हर दिशा में घुमाया जाता था। यदि कभी इस बीच कोई कार्यक्रम छूट जाता था तो कई दिनों तक अफसोस बना रहता था। ऐसा ही क्रेज था दूरदर्शन का। उस सुनहरे दौर को आज तक कोई भुला नहीं सका है।

कौन भूल सकता है वो ‘सुरभि’, ‘रजनी’, ‘नुक्कड़’, ‘विक्रम-बेताल’, ‘चित्रहार’, ‘कथा सागर’, ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’, ‘जंगल बुक’ का युग। हर उम्र और हर वर्ग का कंटेंट था दूरदर्शन पर। कलाकार भी उम्दा थे, जो आज तक लोगों के दिलों में बसे हैं। छोटे विजुअल्स जैसे ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा…’, ‘स्कूल चले हम’, ‘एक चिड़िया अनेक चिड़िया’ आदि की भी व्यूअरशिप बहुत थी। वह सुनहरा दौर और यादें आज भी दिमाग का एक हिस्सा हैं। इतना ही नहीं दूरदर्शन ने गुलाम अली जैसे पाकिस्तानी कलाकारों को भी भारत में मशहूर कर दिया। एक बार गुलाम अली साहब ने बताया था कि ‘जब 1980 में मैंने दूरदर्शन के कार्यक्रम में गजल ‘हंगामा है क्यों बरपा’ गाई थी तब लोगों को पता चला कि यह आदमी कुछ नया लेकर आया है, जो इसका खुद का है। दूरदर्शन ने मेरे कार्यक्रमों को बहुत प्यार से लोगों तक पहुंचाया।’ कल की यादें लौट आई

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