अकेले रह जाते हैं सोशल मीडिया पे भी पीड़ित होने वाले बच्चे

वाशिंगटन। जिन बच्चों का शोषण होता है या जिन्हें तंग किया (बुलीड चिल्ड्रेन) जाता है उनके वास्तविक दुनिया में कुछ ही दोस्त होते हैं।अकेले रह जाते हैं सोशल मीडिया पे भी पीड़ित होने वाले बच्चे मगर, अब सामने आया है कि ऐसे बच्चों के वर्चुअल लाइफ में भी कम ही दोस्त होते हैं।

हालांकि, पहले माना जाता था कि ऐसे पीड़ित बच्चे ऑनलाइन नए दोस्त बना सकते हैं। मगर, एक अध्ययन में सामने आया है कि डिजिटल परिवर्तन के परिणामस्वरुप बने नए संचार मंच में भी वे अकेले ही रह जाते हैं।

गोटेबोर्ग विश्वविद्यालय में सोशल वर्क डिपार्टमेंट में पीएचडी की छात्रा Ylva Bjereld ने स्वीडन, आइसलैंड और फिनलैंड के साथी शोधकर्ताओं के साथ बुलीड चिल्ड्रेन पर अध्ययन किया। उन्होंने ऐसे बच्चों के टेक्स्ट मैसेज, टेलीफोन कम्युनिकेशन और इंटरनेट (TMC) के उपयोग का अध्ययन किया।

इसके लिए 11, 13 और 15 साल की उम्र के लगभग 66,000 बच्चों को अध्ययन में शामिल किया। परिणाम से पता चलता है कि 81 प्रतिशत बच्चों ने साल 2010 में हफ्ते में तीन दिनों दोस्तों के साथ TMC का इस्तेमाल किया, जो साल 2001 की तुलना में 11 प्रतिशत अंक की वृद्धि थी।

हालांकि, या बुलीड चिल्ड्रेन के कुछ दोस्त थे या उनके कोई भी दोस्त नहीं थे। इस दौरान उनके TMC यूज के टाइम में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वे साल 2001 में स्तर पर ही छोड़ दिए गए थे। जुल्म और बदमाशी के शिकार हुए बच्चों पर किए गए पिछले शोधों से पता चलता है कि वे आम बच्चों की तुलना में अधिक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थे।

जब उन्होंने TMC का उपयोग करना शुरू किया, तो इन बच्चों ने अपनी वर्तमान दोस्ती को मजबूत किया और और नए दोस्त भी बनाए थे। Ylva Bjereld ने बताया कि यह तरीका संभवतः उन्हें मानसिक बीमारी की समस्याओं से बचा सकता है।

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